अमिताभ बच्चन किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह बॉलीवुड के सबसे सफल और सम्मानित अभिनेताओं में गिने जाते हैं। 1989 की थ्रिलर फिल्म ‘मैं आज़ाद हूं’ में उनके साथ काम कर चुके अभिनेता राजा बुंदेला ने हाल ही में महानायक के साथ अपने अनुभव साझा किए और बताया कि अमिताभ बच्चन किस तरह अपने निजी और पेशेवर जीवन के बीच स्पष्ट सीमा बनाए रखते थे।
‘डियर जनरेशन’ पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान राजा बुंदेला ने गोवा में हुई एक शूटिंग का किस्सा सुनाया, जो अमिताभ बच्चन की अनुशासनप्रियता और पेशेवर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राजा ने बताया कि अमिताभ बच्चन को अपने संवाद पूरी तरह याद रहते थे और वह हर छोटी-बड़ी बात पर खास ध्यान देते थे।
राजा के अनुसार, गोवा में शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन के कंटीन्यूटी वाले जूते मुंबई में ही रह गए थे। उस दौर में उड़ानें कम होती थीं और पूरी यूनिट में अफरा-तफरी मच गई। दृश्य ऐसा था जिसमें अमिताभ सड़क पर चलते हुए झुककर सेब उठाते हैं, इसलिए जूतों का दिखना और उनकी निरंतरता बेहद जरूरी थी।
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राजा ने बताया कि उस समय अमिताभ बच्चन शूट खत्म होने के बाद भी अपने कंटीन्यूटी से जुड़ा सामान खुद अपने पास रखते थे और उसे प्रोडक्शन के भरोसे नहीं छोड़ते थे। लेकिन उस दिन गलती से उनके स्पॉट बॉय से जूते मुंबई में छूट गए। कई लोगों ने यह मान लिया कि अगली सुबह शूटिंग नहीं होगी और जश्न मनाने लगे।
हालांकि, अगली सुबह साढ़े सात बजे अमिताभ बच्चन पूरी तरह तैयार होकर सेट पर मौजूद थे। बाद में पता चला कि उन्होंने रात में ही अपने स्पॉट बॉय को बस से मुंबई भेजा, जिसने जूते लाकर उनको दिया। अमिताभ ने निर्देशक टीनू आनंद को फोन कर शूटिंग शुरू करने को कहा।
राजा बुंदेला ने यह भी बताया कि अमिताभ बच्चन कभी गपशप नहीं करते थे। यहां तक कि घर पर मिलने के दौरान भी वह समय का सख्ती से पालन करते थे। उन्होंने सुना था कि अमिताभ शाम आठ बजे के बाद इंडस्ट्री के लोगों को घर पर नहीं आने देते थे और परिवार व काम के बीच संतुलन बनाए रखते थे।
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