टीवी और फिल्म अभिनेता रोहित रॉय की टेलीविजन को “डस्टबिन मीडियम” बताने वाली टिप्पणी ने मनोरंजन जगत में टीवी और फिल्मों के बीच लंबे समय से चली आ रही बहस को फिर हवा दे दी है। उनकी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आलोचना की, जबकि कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने टेलीविजन कलाकारों का समर्थन किया।
क्यों विवादों में आई रोहित रॉय की टिप्पणी?
किंडल कास्ट यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में रोहित रॉय से पूछा गया कि क्या टीवी कलाकारों को फिल्म अभिनेताओं से कमतर समझे जाने वाली धारणा को मनोरंजन उद्योग ने स्वीकार कर लिया है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि फिल्म और टीवी कलाकारों के सार्वजनिक व्यवहार और खुद को पेश करने के तरीके में अंतर दिखाई देता है।
रोहित रॉय ने कहा कि स्थापित फिल्म सितारे सार्वजनिक स्थानों पर एक खास तरह की गरिमा और प्रस्तुति बनाए रखते हैं। इसके विपरीत उन्होंने टीवी कलाकारों की कुछ सार्वजनिक सभाओं का जिक्र करते हुए उनके पहनावे, व्यवहार और पैपराजी के साथ बातचीत को कम परिष्कृत बताया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह फिल्मों और टेलीविजन के बीच पदानुक्रम को स्वीकार करना नहीं है, तो उन्होंने अपनी राय कायम रखी। उन्होंने सिनेमा को “पोस्टेरिटी” के लिए बताया और टेलीविजन को दोबारा “डस्टबिन मीडियम” कहा।
रोहित रॉय ने टीवी से ही अपने करियर की शुरुआत की थी और स्वाभिमान, कुसुम, किट्टी पार्टी तथा देस में निकला होगा चांद जैसे धारावाहिकों से पहचान बनाई। उन्होंने यह भी माना कि टीवी कलाकारों के साथ लंबे समय से सौतेला व्यवहार होता आया है।
मुकेश छाबड़ा ने किया टीवी कलाकारों का बचाव
मुकेश छाबड़ा ने बिना किसी का नाम लिए टीवी कलाकारों की मेहनत की तारीफ की। उन्होंने कहा कि टेलीविजन कलाकारों को बड़ी मात्रा में संवाद याद करने, लगभग रोज काम करने और शूटिंग की बदलती जरूरतों के अनुसार तेजी से ढलने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।
अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी और अभिनेता नमन शॉ ने भी रोहित रॉय की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और टीवी इंडस्ट्री का बचाव किया। इस विवाद ने एक बार फिर फिल्म और टेलीविजन कलाकारों के बीच भेदभाव की धारणा पर बहस छेड़ दी है।