नई दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की प्रमुख नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया। सीजेपी ने कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने के लिए प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि, नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) ने मार्च की अनुमति नहीं दी थी।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, अभिजीत दिपके को दो नोटिस दिए गए। एक नोटिस में उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों का हवाला देते हुए सेंट्रल पार्क नहीं जाने को कहा गया। दूसरा नोटिस हवाई अड्डे पर हुई पिछली घटना से संबंधित था, जिसमें दिपके, आशुतोष और सौरव को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उस समय अदालत ने उन्हें एक वर्ष तक सार्वजनिक शांति भंग नहीं करने का निर्देश दिया था।
दिपके को झंडेवालान स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया, जबकि नेहा बोरा को मंडी हाउस इलाके में रोका गया। दोनों को हिरासत में लेते समय मौके पर सुरक्षाकर्मियों, मीडिया और लोगों की भीड़ जुट गई।
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मार्च को देखते हुए पुलिस ने यातायात बाधित होने, भगदड़ और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पैदा होने की आशंका जताई थी। नई दिल्ली क्षेत्र में छह हजार से अधिक पुलिसकर्मी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 220 कंपनियां तैनात की गईं। प्रत्येक कंपनी में लगभग 100 जवान शामिल बताए गए।
कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में धारा 163 लागू होने के कारण सामूहिक जमावड़े पर प्रतिबंध था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के एक छोटे समूह को किसी वैकल्पिक स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की सुविधा देने की पेशकश की। एनडीएमसी ने भी प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए शुक्रवार और शनिवार को सेंट्रल पार्क बंद रखने की घोषणा की।
सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। गुरुवार को दिपके ने कहा था कि वह शांतिपूर्वक तिरंगा फहराने जाएंगे और हिरासत से नहीं डरेंगे।
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