कई वर्षों से इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप स्नातकों और युवाओं के लिए करियर की शुरुआत करने का एक प्रभावी माध्यम रही हैं। इन अवसरों के जरिए युवा अपनी पढ़ाई को वास्तविक कार्य अनुभव से जोड़ पाते थे, नई कौशल सीखते थे और स्थायी रोजगार की दिशा में कदम बढ़ाते थे। वहीं संगठनों के लिए भी यह एक भरोसेमंद तरीका था, जिससे वे संभावित कर्मचारियों की पहचान कर सकते थे और भविष्य के लिए प्रतिभा तैयार कर सकते थे।
लेकिन हाल के वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और एजेंटिक सिस्टम्स में हुई तेज़ प्रगति ने इस पारंपरिक ‘ऑन-द-जॉब’ सीखने और भर्ती प्रक्रिया को चुनौती के दौर में डाल दिया है। कई संगठन अब अपने एंट्री-लेवल पदों और बजट पर पुनर्विचार कर रहे हैं। वे एआई पर खर्च बढ़ा रहे हैं, जबकि इंटर्नशिप और शुरुआती नौकरियों जैसी भूमिकाओं में कटौती की जा रही है। इसका सीधा असर छात्रों और युवा पेशेवरों पर पड़ रहा है, जो कार्य अनुभव के लिए इन्हीं अवसरों पर निर्भर रहते थे।
एआई के बढ़ते उपयोग से दोहराव वाले और बुनियादी कार्य तेजी से स्वचालित हो रहे हैं। वे काम, जो पहले नए कर्मचारियों या इंटर्न्स को सौंपे जाते थे, अब मशीनें कर रही हैं। इससे युवाओं के लिए कार्यस्थल पर सीखने के मौके कम हो रहे हैं और करियर की पहली सीढ़ी तक पहुंचना पहले से कहीं अधिक कठिन होता जा रहा है।
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हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि एआई का युग केवल चुनौतियां ही नहीं, बल्कि नए अवसर भी लेकर आया है। आज के युवाओं के लिए जरूरी हो गया है कि वे डिजिटल साक्षरता, डेटा विश्लेषण, समस्या-समाधान, रचनात्मक सोच और मानवीय कौशल जैसे संचार व टीमवर्क पर ध्यान दें। साथ ही, एआई टूल्स के साथ काम करना सीखना भी भविष्य के करियर के लिए अहम बनता जा रहा है।
एआई के इस दौर में सफल करियर की शुरुआत के लिए युवाओं को निरंतर सीखने, खुद को नई तकनीकों के अनुरूप ढालने और पारंपरिक रास्तों से हटकर नए अवसर तलाशने की आवश्यकता है।
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