भारत जब अपने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल रहा है और वैश्विक निर्यात बाजार में हिस्सेदारी की ओर कदम बढ़ा रहा है, तब परमाणु प्रतिष्ठान के भीतर स्वदेशी लाइट वाटर रिएक्टर (एलडब्ल्यूआर) के निर्माण को तेज करने की आवश्यकता को प्राथमिकता के रूप में चिन्हित किया गया है।
इस दिशा में परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) द्वारा 900 मेगावाट इलेक्ट्रिक (एमडब्ल्यूई) क्षमता वाले एलडब्ल्यूआर प्रोजेक्ट पर काम तेज करने के लिए एक संगठित प्रयास किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना पर डिजाइन का काम वर्ष 2015 में शुरू हुआ था, लेकिन अब इसे गति देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाइट वाटर रिएक्टरों का वर्चस्व है और वैश्विक परमाणु रिएक्टर बाजार का बड़ा हिस्सा इन्हीं पर आधारित है। अधिकारियों का कहना है कि यदि भारतीय कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल नहीं किया गया, तो निर्यात क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करना मुश्किल होगा। ऐसे में स्वदेशी एलडब्ल्यूआर का विकास भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
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भारत के पास पहले से ही प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) का एक मजबूत और विश्वसनीय बेड़ा मौजूद है। अब एलडब्ल्यूआर को इस प्रणाली के साथ जोड़ने से भारत को विदेशी विक्रेताओं के साथ बातचीत में बेहतर स्थिति मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे आयात सौदों में अधिक अनुकूल शर्तें हासिल करने में मदद मिलेगी।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि स्वदेशी एलडब्ल्यूआर न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को वैश्विक परमाणु ऊर्जा बाजार में एक प्रतिस्पर्धी निर्यातक के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। निजी क्षेत्र की भागीदारी और वैश्विक बाजार की ओर झुकाव के साथ, यह कदम भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा और औद्योगिक रणनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
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