केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि यह कानून विदेशी वित्तपोषित विकास कार्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता तथा जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। मंत्रालय ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) के माध्यम से प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 और जून 2026 में अधिसूचित संशोधित एफसीआरए नियमों के प्रमुख प्रावधानों को भी स्पष्ट किया है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, एफसीआरए का उद्देश्य विदेशी स्रोतों से प्राप्त धनराशि के स्वीकार, उपयोग और उसकी रिपोर्टिंग को विनियमित करना है। यह कानून तय करता है कि कौन-सी संस्थाएं विदेशी योगदान प्राप्त कर सकती हैं, धन किस प्रकार प्राप्त होगा, उसका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जाएगा और उसका विवरण किस प्रकार सरकार को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह ऐसे विदेशी वित्तपोषित कार्यों पर रोक लगाता है जो भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एफसीआरए किसी भी गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) या नागरिक समाज संगठन के लिए विदेशी चंदा प्राप्त करने पर प्रतिबंध नहीं लगाता। पात्र संस्थाएं पंजीकरण या पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद निर्धारित नियमों के तहत विदेशी सहायता ले सकती हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 16,200 पंजीकृत संस्थाओं को करीब ₹22,963 करोड़ का विदेशी अंशदान प्राप्त हुआ। मंत्रालय का कहना है कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि एफसीआरए का उद्देश्य विदेशी फंडिंग पर रोक लगाना नहीं, बल्कि उसे पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
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सरकार के अनुसार, एफसीआरए पांच प्रमुख सिद्धांतों—पारदर्शिता, जवाबदेही, संप्रभुता की रक्षा, वास्तविक विकास कार्यों को प्रोत्साहन तथा जनविश्वास—पर आधारित है। इसके तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाली प्रत्येक संस्था को पंजीकरण कराना, निर्धारित बैंक खाते के माध्यम से धन प्राप्त करना, दाताओं की जानकारी देना तथा धन के उपयोग का वार्षिक ऑडिट सहित ऑनलाइन विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
एफसीआरए का इतिहास वर्ष 1976 से शुरू होता है। 1984 में इसमें संशोधन कर विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया। इसके बाद 2010 में नया कानून लागू हुआ, जबकि 2016, 2018, 2020 और अब 2026 में इसमें संशोधन किए गए। वर्ष 2020 के संशोधन में सभी विदेशी अंशदान को भारतीय स्टेट बैंक की नई दिल्ली मुख्य शाखा के निर्दिष्ट खाते में प्राप्त करना अनिवार्य किया गया। साथ ही पदाधिकारियों के लिए आधार या पासपोर्ट पहचान, विदेशी धन के पुनर्वितरण (सब-ग्रांटिंग) पर रोक तथा प्रशासनिक खर्च की सीमा 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दी गई।
एफसीआरए के तहत कोई भी संस्था, जो कम से कम तीन वर्षों से कार्यरत है, पूर्ण पंजीकरण प्राप्त कर सकती है। वहीं किसी विशेष परियोजना के लिए पूर्व अनुमति भी ली जा सकती है। पंजीकरण की वैधता पांच वर्ष होती है और अनुपालन की समीक्षा के बाद इसका नवीनीकरण किया जाता है। प्रशासनिक खर्च वार्षिक विदेशी अंशदान के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता तथा प्रत्येक संस्था को एफसी-4 फॉर्म के माध्यम से वार्षिक लेखा-जोखा जमा करना होता है।
मंत्रालय ने बताया कि विदेशी अंशदान का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सामाजिक कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक संरक्षण, आपदा राहत, वैज्ञानिक अनुसंधान और धार्मिक एवं परोपकारी गतिविधियों सहित अनेक क्षेत्रों में किया जा सकता है। हालांकि चुनाव उम्मीदवारों, सांसदों-विधायकों, न्यायाधीशों, सरकारी कर्मचारियों, राजनीतिक दलों, राजनीतिक प्रकृति के संगठनों तथा समाचार और समसामयिक मामलों से जुड़े कुछ मीडिया संस्थानों को विदेशी अंशदान प्राप्त करने की अनुमति नहीं है।
प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 में विदेशी सहायता से निर्मित परिसंपत्तियों के प्रबंधन को लेकर नया प्रावधान किया गया है। यदि किसी संस्था का एफसीआरए पंजीकरण समाप्त हो जाता है, तो ऐसी परिसंपत्तियां अस्थायी रूप से एक नामित प्राधिकरण के अधीन रहेंगी। यदि संस्था निर्धारित अवधि में अपना पंजीकरण बहाल कराने में सफल रहती है तो उसकी संपत्तियां वापस कर दी जाएंगी। अन्यथा इन परिसंपत्तियों का उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाएगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल विदेशी अंशदान से निर्मित संपत्तियों पर लागू होगी, संस्था की अन्य निजी संपत्तियों पर नहीं। पूजा स्थलों की धार्मिक प्रकृति भी यथावत बनी रहेगी।
संशोधित नियमों के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र में अब यह स्पष्ट होगा कि विदेशी धन किस उद्देश्य और किस भौगोलिक क्षेत्र में उपयोग किया जा सकता है। नवीनीकरण के लिए पिछले दो वर्षों में कम से कम ₹10 लाख के विदेशी अंशदान के उपयोग का प्रमाण देना होगा। इसके अलावा परियोजना-वार खर्च, वेबसाइट और सोशल मीडिया खातों की जानकारी तथा अंतिम विदेशी दाता का विवरण देना भी अनिवार्य किया गया है।
गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि एफसीआरए सभी धर्मों, समुदायों और विचारधाराओं पर समान रूप से लागू होता है। धार्मिक स्थलों के रखरखाव, धार्मिक शिक्षा और परोपकारी गतिविधियों के लिए विदेशी सहायता प्राप्त करना अब भी अनुमेय है, लेकिन विदेशी धन के माध्यम से धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों पर प्रतिबंध सभी धर्मों के लिए समान रूप से लागू रहेगा।
मंत्रालय के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और कई अन्य लोकतांत्रिक देशों में भी विदेशी फंडिंग और विदेशी प्रभाव से संबंधित पारदर्शिता कानून लागू हैं। सरकार का कहना है कि 2026 के संशोधनों का उद्देश्य विदेशी अंशदान की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना, सुशासन को मजबूत करना और जनता का विश्वास बढ़ाना है, ताकि विकास कार्यों के साथ-साथ देश के लोकतांत्रिक संस्थानों और संप्रभु हितों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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