भारत में गोल्ड लोन की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और अब यह वाहन (कार) लोन को भी पीछे छोड़ चुका है। क्रिसिल रेटिंग्स (CRISIL Ratings) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में गोल्ड लोन देश का सबसे बड़ा सिक्योरिटाइज्ड एसेट क्लास बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में कुल सिक्योरिटाइजेशन कारोबार लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। इसमें गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही, जबकि वाहन लोन की हिस्सेदारी घटकर 26 प्रतिशत पर आ गई।
इस तरह पहली बार गोल्ड लोन ने कार लोन को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ा सेगमेंट बन गया है।
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गोल्ड लोन की मांग बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि और लोगों की तत्काल वित्तीय जरूरतों ने इसे एक आसान और सुरक्षित विकल्प बना दिया है। इसके अलावा, गोल्ड लोन लेने की प्रक्रिया सरल होती है, दस्तावेज कम लगते हैं और लोन जल्दी मिल जाता है।
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने भी इस क्षेत्र में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की है और गोल्ड लोन के जरिए भारी मात्रा में फंड जुटाया है।
क्रिसिल की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सरकारी और निजी बैंकों ने गोल्ड लोन आधारित सिक्योरिटाइजेशन में अधिक निवेश किया है, क्योंकि इसमें डिफॉल्ट का जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है और नियामकीय लाभ भी मिलता है।
अन्य लोन सेगमेंट की बात करें तो माइक्रोफाइनेंस लोन की हिस्सेदारी बढ़कर 14 प्रतिशत और बिजनेस लोन की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं मॉर्गेज आधारित सिक्योरिटाइजेशन (MBS) का हिस्सा घटकर 12 प्रतिशत रह गया है।
क्रिसिल का अनुमान है कि आने वाले समय में भी सिक्योरिटाइजेशन बाजार में तेजी जारी रहेगी। रिटेल लोन की मजबूत मांग और निवेशकों की बढ़ती रुचि इस सेक्टर को आगे बढ़ाएगी।
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