भारत सरकार के सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजरानी बाधित होने की खबरों के बावजूद देश की ऊर्जा आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। सरकार के अनुसार भारत दुनिया के कई हिस्सों से तेल और गैस आयात करता है, इसलिए वह केवल इस मार्ग पर निर्भर नहीं है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों के लिए कच्चा तेल मुख्य कच्चा माल होता है। इनमें से आधे से अधिक तेल की आपूर्ति मध्य पूर्व के देशों से होती है और वह आमतौर पर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। हालांकि हाल ही में ईरान संकट के कारण इस मार्ग से आने वाली आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि देश की स्थिति “काफी आरामदायक” है। सभी रिफाइनरियों को एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर उत्पादन और बढ़ाने की व्यवस्था भी मौजूद है। वर्तमान में देश में लगभग 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं। अगर जरूरत पड़ी तो पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए निर्धारित एलपीजी को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी मोड़ा जा सकता है।
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सूत्रों ने यह भी बताया कि भारत लगातार रूस से भी कच्चा तेल आयात कर रहा है। फरवरी महीने में रूस से प्रतिदिन लगभग 10.4 लाख बैरल तेल आयात किया गया, जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 20 प्रतिशत है।
एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) के मामले में भी सरकार के पास विकल्प मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर प्राथमिकताओं को बदला जा सकता है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और एलएनजी इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
हाल ही में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद ईरान ने इस जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। इसके साथ ही ईरान ने कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे पश्चिम एशियाई देशों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
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