अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बाद खाड़ी क्षेत्र में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हवाई हमलों के बाद हुई थी, जिसमें ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत हो गई थी। तब से अब तक खाड़ी क्षेत्र में 13 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन भारतीय अब भी लापता हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाज लगातार हमलों का सामना कर रहे हैं। हाल ही में दो व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य भारतीय घायल हुए हैं। इनमें से दो की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
यह संघर्ष उस समय और तेज हो गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के तहत ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की। इसके बाद ईरान ने जवाबी हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी की घोषणा कर दी। इससे वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा है।
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मंगलवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि हाल में निशाना बनाए गए दो व्यापारिक जहाजों पर कुल 30 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। एक जहाज पर 12 भारतीय थे, जिनमें एक की मौत हुई, जबकि दूसरे जहाज पर 18 भारतीय थे और उनमें से नौ घायल हुए।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप व्यावसायिक जहाजों और नागरिक ढांचे पर सभी हमले तुरंत बंद होने चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल हो सके।
इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका ईरान की नाकेबंदी को फिर से लागू करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क वसूलेगा। 14 जून को हुआ युद्धविराम भी टूट चुका है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है।
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