भारत और नामीबिया ने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 592.94 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 568.40 मिलियन डॉलर था। यह सहमति नई दिल्ली में 10 और 11 अगस्त को आयोजित भारत-नामीबिया संयुक्त व्यापार समिति के चौथे सत्र के दौरान बनी। बैठक के समापन पर दोनों सह-अध्यक्षों ने सहमत कार्यवृत्त पर हस्ताक्षर किए।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित कुमार ने किया। नामीबिया के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं व्यापार मंत्रालय की कार्यकारी निदेशक नदिताह नगीपोंडोका-रोबियाती ने की। वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव यशवीर सिंह ने उद्घाटन संबोधन दिया।
दोनों देशों ने व्यापार को केवल कच्चे माल तक सीमित रखने के बजाय नामीबिया में स्थानीय प्रसंस्करण और अधिक मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही, बैठक में लिए गए फैसलों को लागू करने के लिए स्पष्ट समयसीमा और जिम्मेदारियों के साथ ठोस तंत्र स्थापित करने पर सहमति बनी।
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वर्ष 2025-26 में भारत का नामीबिया को निर्यात 349.09 मिलियन डॉलर रहा, जबकि आयात 243.85 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया। सेवाओं के व्यापार में भी वृद्धि हुई और 2024 में यह 7.34 प्रतिशत बढ़कर 380 मिलियन डॉलर पहुंच गया। इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 124.06 प्रतिशत बढ़कर 30.24 मिलियन डॉलर हो गया। इसमें मोटर वाहनों और उनके कलपुर्जों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का निर्यात 36.50 मिलियन डॉलर रहा। भारत नामीबिया के लिए दवा आपूर्ति का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है और उसकी हिस्सेदारी 16.4 प्रतिशत है।
निवेश, सेवाओं और स्वास्थ्य पर विशेष जोर
निवेश को बढ़ावा देने के लिए इन्वेस्ट इंडिया और नामीबिया निवेश प्रोत्साहन एवं विकास बोर्ड को संयुक्त व्यापार समिति के तहत निवेश संबंधी प्रमुख संपर्क केंद्र बनाया गया है। दोनों देश निवेश से जुड़े मामलों के समन्वय के लिए अधिकारियों को नामित करेंगे।
दोनों देशों ने एक अलग सेवा कार्य समूह बनाने पर भी सहमति जताई है। यह समूह फरवरी 2027 तक अपनी पहली बैठक करेगा और अपनी कार्ययोजना संयुक्त व्यापार समिति को सौंपेगा।
स्वास्थ्य और दवा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की तैयारी है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग संबंधी द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन के तहत पहला संयुक्त कार्य समूह दिसंबर 2026 तक गठित किए जाने की उम्मीद है। एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के साथ जनऔषधि पहल में सहयोग संबंधी समझौता भी अंतिम चरण में है।
महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल भुगतान
महत्वपूर्ण खनिजों को दोनों देशों के बीच सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र माना गया है। लिथियम, ग्रेफाइट, तांबा, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों के अन्वेषण, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन में संभावनाएं तलाशने पर सहमति बनी। इससे नामीबिया में घरेलू मूल्यवर्धन और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
नामीबिया में भारत की एकीकृत भुगतान प्रणाली यूपीआई पर आधारित तत्काल भुगतान व्यवस्था शुरू होने के बाद दोनों पक्षों ने डिजिटल भुगतान सहयोग की भी समीक्षा की। जून 2026 में ‘वायामी’ नाम से शुरू की गई यह प्रणाली दोनों देशों के बीच डिजिटल वित्तीय संपर्क मजबूत कर सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक और बैंक ऑफ नामीबिया के बीच फिनटेक सहयोग ढांचा बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।
रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में नामीबिया को सूरत और मुंबई स्थित भारत के विशेष अधिसूचित क्षेत्रों तथा इंडिया रफ जेमस्टोन्स सोर्सिंग शो में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। भारत नामीबिया में हीरा काटने, तराशने और आभूषण डिजाइन के प्रशिक्षण में भी सहयोग करेगा।
ऊर्जा और बुनियादी ढांचे में साझेदारी
दोनों देशों ने रेलवे, रेल डिब्बों एवं उपकरणों, सौर और पवन ऊर्जा, बैटरी भंडारण, विद्युत पारेषण, हरित हाइड्रोजन, जैव ईंधन और समुद्री जल के विलवणीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशीं।
भारत और दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ के बीच तरजीही व्यापार समझौते के लिए संदर्भ शर्तों को भी अंतिम रूप दिया गया है। इन शर्तों पर 12 अगस्त को हस्ताक्षर होने हैं। इसके एक महीने के भीतर वार्ता शुरू करने और एक वर्ष में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
संयुक्त व्यापार समिति की बैठक में कृषि और खाद्य सुरक्षा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, कपड़ा, पर्यटन और खेल जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा हुई।
भारत-नामीबिया संयुक्त व्यापार समिति दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग की समीक्षा तथा उसे मजबूत करने का प्रमुख संस्थागत माध्यम है। समिति का पांचवां सत्र 2028 में नामीबिया में आयोजित किया जाएगा। इसकी तारीख राजनयिक माध्यमों से तय की जाएगी।
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