प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए भारतीय फार्मा उद्योग को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कम से कम एक-दो भारतीय दवा कंपनियों को दुनिया की शीर्ष पांच फार्मा कंपनियों में प्रमुख स्थान हासिल करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने फार्मा क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन अब भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में और बड़ी भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय फार्मा उद्योग उत्पादन की मात्रा के लिहाज से दुनिया में तीसरे और मूल्य के लिहाज से 11वें स्थान पर है।
भारत में इस क्षेत्र में 3,000 से अधिक कंपनियां और करीब 10,500 विनिर्माण इकाइयां हैं। देश का दवा बाजार वर्तमान में लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर का है और वर्ष 2030 तक इसके 130 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
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आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय दवा क्षेत्र का वार्षिक कारोबार करीब 4.72 लाख करोड़ रुपये रहा। वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच दवाओं के निर्यात में औसतन सात प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने फार्मा के साथ-साथ रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को रक्षा क्षेत्र में घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।
उन्होंने हरित अर्थव्यवस्था के तहत नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और विनिर्माण में निवेश बढ़ाने की बात कही। साथ ही, उन्होंने ब्लू इकोनॉमी में भारत के अवसरों को रेखांकित किया।
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