विश्व प्रसिद्ध पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए बड़े स्तर पर तैयारियां की हैं। लाखों भक्तों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए भारतीय रेलवे पुरी के लिए 300 से अधिक विशेष ट्रेनें चलाएगा, जबकि ओडिशा सरकार ने अलग-अलग जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए करीब 800 बसों की व्यवस्था की है।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के तीनों रथ गुरुवार को पुरी की ग्रैंड रोड पर निकलेंगे। पूरे पुरी शहर को बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया है। राज्य पुलिस, केंद्रीय बलों, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के जवानों को तैनात किया गया है। प्रशासन का मुख्य ध्यान भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था पर है।
रथ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुरी में बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई। इसमें राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), ओडिशा अग्निशमन सेवा, स्काउट्स एंड गाइड्स तथा अन्य एजेंसियों ने हिस्सा लिया। इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करना था।
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भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं। इस बार भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष, भगवान बलभद्र का तलध्वज और देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ विशेष अनुष्ठानों के बाद यात्रा के लिए तैयार हैं।
बारिश की संभावना को देखते हुए ग्रैंड रोड से पानी निकालने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं द्वारा रथों को खींचने में परेशानी न हो। रथ करीब 2.6 किलोमीटर की दूरी तय कर 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से श्री गुंडिचा मंदिर तक जाएंगे।
सुरक्षा के लिए पुरी में 13 हजार पुलिसकर्मी, केंद्रीय सशस्त्र बलों की 15 कंपनियां, एनएसजी कमांडो और समुद्र तट पर 500 लाइफगार्ड तैनात किए गए हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और कई मंत्री भी व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए पुरी में मौजूद हैं।
मौसम विभाग की खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए पुरी जिला प्रशासन ने बुधवार को सभी स्कूल बंद रखने का फैसला लिया। श्रद्धालुओं को बिजली गिरने और आंधी-तूफान के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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