कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी, जो दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) हब है, पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है। इस हमले के चलते गैस उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
यह हमला इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले के जवाब में किया गया है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान लगातार तेल और गैस से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बना रहा है।
भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि देश अपनी जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल और लगभग 50 प्रतिशत गैस आयात करता है। कतर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर है, जो देश के कुल एलपीजी आयात का लगभग एक-तिहाई और एलएनजी का करीब आधा हिस्सा उपलब्ध कराता है।
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रास लफान पर हमले के कारण भारत की लगभग 20 प्रतिशत गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे 47.4 एमएमएससीएमडी की कमी सामने आई है। इसके चलते बिजली और औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की खपत कम करनी पड़ रही है। सरकारी कंपनियां वैकल्पिक एलएनजी स्रोत तलाशने में जुटी हैं ताकि ऊर्जा संकट को टाला जा सके।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि मध्य पूर्व में होने वाली हर घटना का असर भारत पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी 90 प्रतिशत एलपीजी और 47 प्रतिशत एलएनजी कतर से आयात करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह संकट लंबा खिंचता है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।
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