भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि भारत को ऐसे मजबूत पूंजी बाजार की जरूरत है, जो पूंजी जुटाने, जोखिम प्रबंधन और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि मजबूत और पारदर्शी बाजार आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
नई दिल्ली में आयोजित कमोडिटी एंड कैपिटल मार्केट पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के 12वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए पांडे ने कहा कि सेबी बाजार की संरचना को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां परिवार और आम निवेशक भरोसे के साथ निवेश कर सकें, कारोबार अपने विस्तार के लिए पूंजी जुटा सकें और बाजार मध्यस्थ उच्च आचरण मानकों का पालन करें।
सेबी अध्यक्ष ने कहा कि नियामक क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) की शुरुआत के बाद वायदा एवं विकल्प कारोबार में समाप्ति दिवस पर निपटान मूल्य तय करने से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर रहा है। सीएएस का उद्देश्य बाजार बंद होने के समय पात्र शेयरों के लिए बेहतर मूल्य खोज सुनिश्चित करना है। इसके तहत कॉल-ऑक्शन प्रक्रिया के माध्यम से एक संतुलित मूल्य निर्धारित किया जाता है, जिससे केवल वॉल्यूम-वेटेड औसत मूल्य पर निर्भरता कम होती है।
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पांडे ने कहा कि सेबी नकद बाजार में तरलता बढ़ाने और उसे बेहतर बनाने, निवेशकों की भागीदारी का विस्तार करने तथा प्रतिभूति उधार एवं ऋण व्यवस्था को मजबूत करने पर भी काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रभावी हेजिंग और आर्बिट्राज से मूल्य खोज की प्रक्रिया बेहतर हो सकती है तथा नकद और डेरिवेटिव बाजारों के बीच बेहतर तालमेल विकसित हो सकता है। सेबी गैर-कृषि अनुबंधों में पोजिशन लिमिट की भी समीक्षा कर रहा है, ताकि जोखिम नियंत्रण बनाए रखते हुए बाजार में तरलता और गहराई बढ़ाई जा सके।
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