ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार (28 फरवरी) को अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए बड़े सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य और रक्षा अधिकारियों के मारे जाने की खबर है। खुफिया जानकारी के आधार पर अमेरिकी और इज़राइली एजेंसियों ने तीन उच्चस्तरीय बैठकों का पता लगाया, जिनमें ख़ामेनेई भी शामिल थे। इसके तुरंत बाद दिन के उजाले में सटीक हवाई हमले किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल ने 200 लड़ाकू विमानों के जरिए 500 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन लक्ष्यों में परमाणु संयंत्र, मिसाइल फैक्ट्रियां, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के अड्डे और कमांड सेंटर शामिल थे। तेहरान स्थित ख़ामेनेई के आवासीय परिसर पर 30 बम गिराए गए, जिसमें उनके परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए।
हमले में सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी, आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद पकपोर, रक्षा मंत्री अज़ीज़ नासिरज़ादेह, सालेह असादी, मोहम्मद शिराज़ी, हुसैन जब्बार अमेलियन और रेज़ा मोज़फ्फर-निया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई है।
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इज़राइल ने इसे अपनी अब तक की सबसे बड़ी हवाई कार्रवाई बताया है। बताया जा रहा है कि यह हमला ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर संभावित हमले की योजना को विफल करने के लिए किया गया।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “बड़ी सफलता” करार दिया और कहा कि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम था।
इन हमलों के बाद आईआरजीसी ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है और कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने से ईरान की कमान व्यवस्था को गहरा झटका लगा है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है।
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