वेनेज़ुएला के तेल उद्योग के पतन का सीधा असर अब क्यूबा पर पड़ता दिख रहा है, जिससे देश गंभीर ऊर्जा और खाद्य संकट की ओर बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट बाज़ारों से बाहर और रियायती वेनेज़ुएलाई तेल की आपूर्ति से वंचित क्यूबा एक गहरे विदेशी मुद्रा संकट में फंसता जा रहा है, जिसने उसकी पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को और पंगु बना दिया है।
वेनेज़ुएला और क्यूबा के बीच संबंध दशकों से बेहद करीबी रहे हैं। हाल ही में वेनेज़ुएला में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान मारे गए लगभग 100 लोगों में 32 क्यूबाई नागरिक भी शामिल थे, जो राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सुरक्षा टीम का हिस्सा थे। यह घटना दोनों देशों के बीच गहरे राजनीतिक और रणनीतिक रिश्तों को उजागर करती है।
पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ के नेतृत्व में शुरू हुए बोलिवेरियन आंदोलन के बाद से वेनेज़ुएला और क्यूबा के संबंध और मजबूत हुए। इस दौरान कराकास क्यूबा के लिए आयातित तेल का सबसे बड़ा स्रोत बन गया। दोनों देशों के बीच “ऑयल-फॉर-डॉक्टर्स” समझौते के तहत वेनेज़ुएला क्यूबा को रियायती दरों पर कच्चा तेल देता था, जबकि बदले में क्यूबा चिकित्सा सेवाएं, तकनीकी सहयोग और सैन्य सहायता प्रदान करता था।
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लेकिन अब वेनेज़ुएला के तेल उत्पादन में भारी गिरावट और आर्थिक संकट के कारण यह आपूर्ति बाधित हो गई है। इसका नतीजा यह हुआ है कि क्यूबा को ईंधन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कटौती बढ़ गई है, परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है और खाद्य पदार्थों के उत्पादन व वितरण पर भी असर पड़ा है।
ऊर्जा संकट के चलते क्यूबा में कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। विदेशी मुद्रा की कमी के कारण आवश्यक वस्तुओं का आयात भी मुश्किल हो गया है, जिससे आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर सीधा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक क्यूबा को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत या नए वित्तीय साझेदार नहीं मिलते, तब तक यह संकट और गहराने की आशंका है।
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