केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को असम के धेमाजी में आयोजित 10वें मिसिंग युवा महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय अधिकारों की रक्षा हथियारों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और ऐसे आयोजनों के माध्यम से होती है। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अमित शाह ने कहा कि मिसिंग युवा महोत्सव ने देशभर की जनजातियों को स्पष्ट दिशा दिखाई है। उन्होंने कहा कि संस्कृति, भाषा, साहित्य, नृत्य और संगीत की रक्षा आपसी एकता से ही संभव है। भारत की संस्कृति अनेक संस्कृतियों का संगम है और मिसिंग संस्कृति उसका अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने मिसिंग समुदाय की डोनी-पोलो परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति की उपासना ईश्वर की उपासना के समान है और यह परंपरा असम, अरुणाचल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे भारत को वैश्विक पहचान दिलाती है।
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गृह मंत्री ने कहा कि पूर्व में कई जनजातियों को अपनी संस्कृति बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर संस्कृति और परंपरा को समान अधिकार देने में विश्वास रखती है। उन्होंने बताया कि बोगीबील पुल, जो वर्षों से लंबित था, मोदी सरकार में चार वर्षों में पूरा हुआ और इसमें मिसिंग समुदाय के श्रमिकों का अहम योगदान रहा।
अमित शाह ने मिसिंग समाज को ब्रह्मपुत्र घाटी की धड़कन बताते हुए स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र रक्षा में उनके बलिदान को याद किया। उन्होंने CAPF में विशेष भर्ती, मिसिंग भाषा को 200 प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा का माध्यम बनाए जाने, 1.56 लाख सरकारी नौकरियों, सेमीकंडक्टर फैक्ट्री और असम के बुनियादी ढांचे के विकास की भी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि असम शांति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है और युवा आज हथियारों की जगह सपनों को चुन रहे हैं।
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