ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण के लिए आज वोटिंग होगी। मुख्य मुकाबला मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा और फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच है। रविवार शाम 4:30 बजे वोटिंग शुरू होगी, जो रात 1:30 बजे तक चलेगी। इसके तुरंत बाद वोटों की गिनती शुरू होगी और शुरुआती रुझान सोमवार सुबह से आने की उम्मीद है।
4 अक्टूबर को हुए पहले चरण में लूला दा सिल्वा को 45% वोट मिले थे, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को 47% वोट मिले थे। दोनों के बीच करीब 22 लाख वोटों का अंतर रहा था। चूंकि किसी भी उम्मीदवार को 50% से ज्यादा वोट नहीं मिले, इसलिए अब दूसरे चरण की वोटिंग कराई जा रही है। चुनाव से ठीक पहले आए सर्वे में फ्लावियो को 50% और लूला को 49% वोट मिलने का अनुमान जताया गया है, जिससे मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है।
चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में दोनों नेताओं ने महंगाई, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे को घेरा। 23 अक्टूबर को हुई आखिरी टीवी बहस में लूला दा सिल्वा ने कहा कि उनकी सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने और गरीबों की मदद के लिए काम किया है। वहीं फ्लावियो बोल्सोनारो ने महंगाई, लोगों पर बढ़ते कर्ज और अपराध को लेकर सरकार पर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।
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लूला दा सिल्वा 2003 से 2010 तक दो बार ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके हैं। 2023 में वे तीसरी बार सत्ता में लौटे थे और अब चौथी बार राष्ट्रपति बनने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी राजनीति का बड़ा आधार गरीब परिवार रहे हैं और उनकी सरकार ने गरीबों को आर्थिक मदद देने तथा न्यूनतम वेतन बढ़ाने पर जोर दिया है, लेकिन इस बार महंगाई और अपराध उनके लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
फ्लावियो बोल्सोनारो पेशे से वकील हैं और सीनेटर भी हैं। वे पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं, जो 2019 से 2022 तक ब्राजील के राष्ट्रपति रहे थे। तख्तापलट की साजिश के मामले में जायर बोल्सोनारो को 27 साल जेल की सजा सुनाई गई है। फ्लावियो बोल्सोनारो अपने पिता की दक्षिणपंथी राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं।
पहले चरण में करीब 3.34 करोड़ लोगों ने वोट नहीं डाला था, जो कुल मतदाताओं का 21% से ज्यादा है। कुछ लोग दोनों उम्मीदवारों से असंतुष्ट थे, जबकि कुछ अन्य कारणों से वोट नहीं डाल सके। अब देखना होगा कि इनमें से कितने लोग दूसरे चरण में मतदान करते हैं।
ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और BRICS का संस्थापक सदस्य भी है, इसलिए यहां सत्ता परिवर्तन का असर केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। लूला दा सिल्वा की सरकार चीन और BRICS देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर देती रही है, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के करीब माना जाता है। इस चुनाव का नतीजा यह तय करेगा कि ब्राजील अमेरिका के करीब जाता है या चीन और BRICS के साथ अपने मौजूदा रिश्तों को और मजबूत करता है।
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