ईरान और चीन के बीच एंटी-शिप क्रूज मिसाइल सौदा अंतिम चरण में बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान चीनी निर्मित सीएम-302 सुपरसोनिक मिसाइलें खरीदने के करीब है, जो विमानवाहक पोत और विध्वंसक जहाजों को निशाना बनाने में सक्षम है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ईरान पर हमले की चेतावनी दे चुका है और मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है।
सीएम-302 मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर बताई जाती है। यह कम ऊंचाई पर तेज गति से उड़ान भरती है, जिससे जहाजों की रक्षा प्रणाली को चकमा देना आसान हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा पूरा होता है तो क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक ताकत के लिए गंभीर चुनौती पैदा हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, मैनपैड्स, एंटी-बैलिस्टिक और एंटी-सैटेलाइट हथियार भी खरीदने पर विचार कर रहा है। यह सौदा 2006 में लगे संयुक्त राष्ट्र हथियार प्रतिबंध की भावना के विपरीत माना जा रहा है, जिसे 2015 के परमाणु समझौते के बाद आंशिक रूप से हटाया गया था।
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विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविच का कहना है कि सुपरसोनिक एंटी-शिप क्षमता “गेमचेंजर” साबित हो सकती है। वहीं स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता पीटर वेज़मैन के अनुसार, यह खरीद ईरान की सैन्य क्षमताओं को उल्लेखनीय बढ़ावा देगी।
इस संभावित सौदे से चीन और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों का संकेत मिलता है, जो अमेरिका की रणनीतिक योजनाओं को जटिल बना सकता है।
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