जेलों का मुख्य उद्देश्य अपराधियों को सुधारना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है। हालांकि, तेलंगाना में सामने आए कुछ मामलों ने जेलों में अपराधियों के बीच बनने वाले नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, कुछ आदतन अपराधी जेल में रहने के दौरान एक-दूसरे से संपर्क बनाते हैं, अपराध करने के तरीके साझा करते हैं और ऐसे संबंध विकसित करते हैं, जो जेल से बाहर आने के बाद आपराधिक साझेदारी में बदल जाते हैं।
तेलंगाना पुलिस को वाहन चोरी से लेकर लोगों का ध्यान भटकाकर की जाने वाली धोखाधड़ी तक के मामलों में ऐसे संबंधों के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जेल में बने संपर्क किस तरह रिहाई के बाद संगठित अपराध का हिस्सा बन रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला 3 जुलाई की रात करीब एक बजे सामने आया। कैब चालक अंगोथ थुलजा अपनी सफेद सेडान कार से सिद्दीपेट के मंगोल एक्स रोड के पास पहुंचा था। वह शौचालय जाने के लिए कार से बाहर निकला। लेकिन जब वह वापस लौटा तो उसका यात्री कार लेकर फरार हो चुका था।
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थुलजा को उस समय यह जानकारी नहीं थी कि उसका यात्री कोई पहली बार चोरी करने वाला व्यक्ति नहीं था। पुलिस ने बाद में उसकी पहचान 32 वर्षीय पेंड्याला सुदर्शन के रूप में की। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुदर्शन आदतन संपत्ति अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
जांच में इससे भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। पुलिस को पता चला कि सुदर्शन के कुछ कथित सहयोगी ऐसे लोग हैं, जिनसे उसकी मुलाकात जेल में रहने के दौरान हुई थी। इससे जांचकर्ताओं को आशंका है कि जेल में बने संपर्कों ने बाद में आपराधिक गतिविधियों के लिए साझेदारी का रूप ले लिया।
तेलंगाना में सामने आ रहे इन मामलों ने जेलों में अपराधियों के बीच बनने वाले संबंधों की निगरानी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जेल सुधार और पुनर्वास के लिए होती हैं, लेकिन आदतन अपराधियों के लिए वहां बने संपर्क कभी-कभी नए अपराध नेटवर्क की नींव भी बन सकते हैं।
पुलिस अब आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के साथ-साथ जेल में बने उनके संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है, ताकि चोरी और धोखाधड़ी के मामलों के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
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