राजस्थान के कोटा में सी-सेक्शन प्रसव के बाद किडनी संक्रमण से जूझ रही पांच महिलाओं ने राष्ट्रपति से मदद की गुहार लगाई है। इन महिलाओं ने अपनी जिंदगी बचाने के लिए 48 घंटे के भीतर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की है। उनका कहना है कि प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई और अब वे लगातार इलाज, दर्द और आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं।
मामला कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) से जुड़ा है, जहां इन महिलाओं की सी-सेक्शन डिलीवरी हुई थी। परिवारों को उम्मीद थी कि दो दिन के अस्पताल प्रवास के बाद वे नवजात बच्चों के साथ घर लौटेंगी, लेकिन इसके बजाय वे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से घिर गईं।
पीड़ित महिलाओं के अनुसार, सी-सेक्शन के बाद उन्हें किडनी संक्रमण हो गया, जिसके कारण उनकी किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हुई। पिछले 68 दिनों में वे 32 बार डायलिसिस करा चुकी हैं। लगातार इलाज और अस्पताल के चक्कर लगाने से परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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महिलाओं और उनके परिजनों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा है कि उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है और समय पर किडनी प्रत्यारोपण नहीं हुआ तो उनकी जान को खतरा हो सकता है।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि इलाज के दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और अब वे लंबे समय से अस्पताल तथा चिकित्सा प्रक्रियाओं के बीच फंसे हुए हैं। उनका कहना है कि सामान्य प्रसव के बाद खुशियां मनाने की जगह उनका जीवन बीमारी और आर्थिक परेशानी से भर गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी संक्रमण के गंभीर मामलों में समय पर इलाज और उचित चिकित्सा प्रबंधन बेहद जरूरी होता है। फिलहाल पीड़ित महिलाओं की मांग है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तत्काल कदम उठाए, ताकि उन्हें बेहतर उपचार मिल सके और उनकी जिंदगी बचाई जा सके। मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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