नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 734 हो गई है, जबकि 2,498 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में शवों के कारण उन्हें सुरक्षित रखने के लिए जगह की कमी सामने आ रही है। ऐसे में नेपाल सरकार ने अज्ञात और लावारिस शवों को एयरटाइट बैग में दफनाने का फैसला किया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बताया कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकेगी, उन्हें सरकार की निगरानी में दफनाया जाएगा। हालांकि, उनकी पहचान भविष्य में सुनिश्चित करने के लिए डीएनए नमूने और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य की पहली प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक की जान बचाना है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, राहत और बचाव कार्यों में 11,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें 5,000 से ज्यादा नेपाली सेना के जवान शामिल हैं।
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हालांकि, बढ़ते जलस्तर के कारण बचाव अभियान में भी खतरा बना हुआ है। एनडीआरआरएमए ने बताया कि रसुवा में भोटे कोशी नदी का जलप्रवाह और बढ़ गया है। इसके चलते रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन समेत प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों में जुटे कर्मचारियों तथा नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
नेपाल ने पहले विदेशी बचाव दलों की मदद लेने से इनकार किया था, लेकिन आपदा के बाद कई देशों के नागरिकों के फंसे या लापता होने के कारण उसने अपना रुख बदल दिया। अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की टीमें नेपाल के स्थानीय अधिकारियों की मदद कर रही हैं।
भारत ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवानों सहित 11 सदस्यीय टीम और चिकित्सा सहायता नेपाल भेजी है। भारत ने काठमांडू को हरसंभव मदद जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने संकट के दौरान सहायता देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की और उन्हें बेहद उदार बताया। इस बीच, नेपाल में राहत, बचाव और शवों की पहचान का अभियान लगातार जारी है।
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