पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शनिवार को हुए एक भीषण विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक स्थानीय राजनीतिक नेता बाल-बाल बच गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। फिलहाल विस्फोट के कारणों का पता नहीं चल पाया है और किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
पुलिस के अनुसार, यह धमाका बाजौर जिले की सलारजई तहसील के ताली बांध के पास हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मौके पर ही दो लोगों की जान चली गई। मृतकों की पहचान सुलेमान कारी और गुलाम के रूप में हुई है, जो बाजौर जिले के निवासी थे। दोनों के शवों को पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रिया के लिए खार अस्पताल भेज दिया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिस समय धमाका हुआ, उस दौरान एक स्थानीय नेता भी वहां मौजूद थे, लेकिन वह सुरक्षित बच निकले। घटना के बाद पूरे इलाके को घेर लिया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने साक्ष्य जुटाने का काम शुरू कर दिया है। बम निरोधक दस्ते और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी जांच में जुटे हुए हैं।
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गौरतलब है कि खैबर पख्तूनख्वा पिछले कई वर्षों से आतंकवादी घटनाओं और उग्रवादी हिंसा का केंद्र बना हुआ है। पाकिस्तान सरकार का आरोप है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने नवंबर 2022 में संघर्ष विराम समाप्त होने के बाद अफगानिस्तान से सटे इलाकों में आतंकी गतिविधियां तेज कर दी हैं। सीमा पार से आतंकियों की आवाजाही और लगातार सैन्य अभियानों के कारण इस क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति लंबे समय से चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
इससे पहले 24 जुलाई को भी खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में एक आत्मघाती हमला हुआ था। विस्फोटकों से भरे वाहन को सुरक्षा चौकी से टकरा दिया गया था, जिसमें 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। मृतकों में 12 सैनिक, 2 पुलिसकर्मी और वन विभाग के एक पूर्व अधिकारी शामिल थे। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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