उत्तर प्रदेश के रायबरेली रेलवे स्टेशन से अगवा किए गए नौ माह के शिशु को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरक्षित बरामद कर लिया है। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने एक बड़े बाल तस्करी नेटवर्क का भी खुलासा किया है, जिसमें दलालों, बिचौलियों और क्लीनिक से जुड़े लोगों की संलिप्तता सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, दिल्ली से मध्य प्रदेश जा रही एक महिला अपने दो छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रही थी। लखनऊ रेलवे स्टेशन पर उसकी मुलाकात एक अज्ञात पुरुष और महिला से हुई। यात्रा के दौरान दोनों ने महिला का विश्वास जीत लिया। बाद में रायबरेली रेलवे स्टेशन पर वे महिला को भोजन कराने के बहाने स्टेशन के बाहर एक ढाबे की ओर ले गए। इसी दौरान दोनों आरोपी महिला के नौ माह के बच्चे को लेकर फरार हो गए।
महिला की शिकायत पर रायबरेली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 140(1) के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने तुरंत कई टीमें गठित कर सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी निगरानी और सर्विलांस की मदद से जांच शुरू की। जांच का सुराग मुरादाबाद और रामपुर क्षेत्र तक पहुंचा, जिसके बाद पुलिस ने अभियान चलाकर बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया।
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जांच में बिहार के अररिया जिले के रहने वाले रामकुमार दास और उसकी पत्नी रेशमा देवी को मुख्य आरोपी बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने महिला का भरोसा जीतकर बच्चे का अपहरण किया।
मामले की जांच में सुमित कुमार नामक बिचौलिए और किरनजीत उर्फ सरदार आंटी की भूमिका भी सामने आई है, जो कथित तौर पर निःसंतान दंपतियों से पैसे लेकर बच्चे दिलाने का काम करते थे। पुलिस के अनुसार, अपहृत बच्चे को मुरादाबाद क्षेत्र के संजय कुमार सैनी को सौंपने की तैयारी थी।
इसके अलावा डॉ. ब्रह्मपाल सिंह, अर्चना, बबीता और हरीशचंद्र समेत कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब पूरे पैसों के लेन-देन और नेटवर्क की जांच कर रही है।
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