मणिपुर की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता के समर्थन में शनिवार (31 जनवरी 2026) को राजधानी इम्फाल में हजारों लोगों ने एक विशाल रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य की सीमाओं और प्रशासनिक ढांचे से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह “सेव मणिपुर” रैली मणिपुर इंटीग्रिटी के लिए समन्वय समिति (COCOMI) द्वारा आयोजित की गई थी, जो कई मैतेई नागरिक समाज संगठनों का एक साझा मंच है। रैली ऐसे समय में आयोजित हुई है जब राज्य लंबे समय से जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।
मणिपुर में मई 2023 से इम्फाल घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और पहाड़ी इलाकों के कूकी-जो समूहों के बीच जातीय संघर्ष जारी है। इस हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में कूकी समुदाय अपने लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग कर रहा है, जिसे लेकर राज्य में तीव्र मतभेद बने हुए हैं।
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शनिवार की रैली के दौरान प्रदर्शनकारी टिड्डिम ग्राउंड से थाउ ग्राउंड तक करीब पांच किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए पहुंचे। उन्होंने “मणिपुर की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता से कोई समझौता नहीं”, “मणिपुर को बांटने की कोशिश बर्दाश्त नहीं” और “विस्थापितों को उनके घरों में बसाया जाए” जैसे नारे लगाए।
इस रैली में मैतेई समुदाय के साथ-साथ गैर-मणिपुरी, मुस्लिम और नागा समुदाय के लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारी बिद्यालक्ष्मी ओइनाम ने कहा कि मणिपुर की अखंडता किसी भी कीमत पर नहीं तोड़ी जानी चाहिए। वहीं, खगेम्बम सुरजीत ने कहा कि मणिपुर की जमीन हमारे पूर्वजों ने बनाई है, न कि म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों ने।
रैली को देखते हुए इम्फाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि राज्य फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन के अधीन है।
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