लखनऊ के होटल कारोबारी शिवा शर्मा की मौत का मामला देशभर में सुर्खियों में है। पुलिस ने इसे हत्या का मामला मानते हुए शिवा की गर्लफ्रेंड श्रद्धा दुबे को जेल भेजा है। चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस डिजिटल और फोरेंसिक सबूत जुटा रही है, लेकिन अभी भी 9 अक्टूबर की शाम श्रद्धा के फ्लैट में हुई घटना को लेकर कई सवाल अनसुलझे हैं।
केजीएमयू के पोस्टमॉर्टम विभाग के डॉ. केके सिंह के अनुसार, शिवा को केजीएमयू लाने से पहले किसी दूसरे अस्पताल ले जाया गया था, जहां वह जीवित था। हालांकि केजीएमयू पहुंचने तक उसकी मौत हो चुकी थी। मौत की जानकारी मिलते ही श्रद्धा और उसके साथ मौजूद लोग वहां से चले गए थे। जांच में सामने आया कि अस्पताल से निकलकर श्रद्धा अपने फ्लैट लौटी, वहां से कपड़े और रुपये लेकर ड्राइवर तनवीर उर्फ दानिश और अपनी बहन रश्मि के साथ लखनऊ से फरार हो गई। श्रद्धा ने दावा किया था कि शिवा की मां रंजना शर्मा अस्पताल पहुंचकर झगड़ा करने लगी थीं, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक रंजना के पहुंचने से करीब एक घंटे पहले ही श्रद्धा जा चुकी थी। नेपाल में 6 दिन बिताने के बाद श्रद्धा 16 अक्टूबर को लखनऊ लौटी और खुद को निर्दोष बताया, लेकिन गिरफ्तारी से पहले फिर फरार हो गई।
शिवा की मां ने श्रद्धा के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई है, जबकि श्रद्धा का कहना है कि शिवा ने खुद कूदकर जान दी। पुलिस के पास फ्लैट के बाहर और मोहल्ले के सीसीटीवी फुटेज, श्रद्धा और शिवा के बीच की तीन कॉल रिकॉर्डिंग जिनमें धमकी और गाली-गलौज सुनी जा सकती है, चैट और बैंक ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड, 7 गवाहों के बयान जिनमें घर की नौकरानी, ड्राइवर और पूर्व ड्राइवर शामिल हैं, तथा श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर तनवीर से जब्त मोबाइल फोन जैसे सबूत मौजूद हैं। पुलिस ने रायबरेली जाकर श्रद्धा के पिता से भी दो घंटे पूछताछ की। एसटीएफ ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड और इंटरनेट डेटा के जरिए श्रद्धा को नागपुर से ट्रेस कर गिरफ्तार किया।
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एक रिकॉर्डिंग में श्रद्धा 'सरजी' नामक व्यक्ति का नाम लेकर शिवा को धमकाती सुनी गई है। बताया जाता है कि 'सरजी' एक बड़े ब्यूरोक्रेसी अधिकारी हैं और श्रद्धा को भरोसा है कि वही उसे बचा लेंगे।
लखनऊ हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील मुकेश शर्मा ने बताया कि पुलिस के पास अभी इस केस में कोई प्रत्यक्षदर्शी (आई विटनेस) नहीं है और सब कुछ बयान व चैट पर निर्भर है, इसलिए रिमांड नहीं मांगी गई। उन्होंने कहा कि अगर प्रत्यक्षदर्शी मिल जाता है तो श्रद्धा को सजा की तरफ ले जाया जा सकता है। उनके मुताबिक अगले 10 दिनों में सबूतों के आधार पर जमानत का फैसला होगा, जबकि रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को जल्द जमानत मिल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एपी सिंह ने कहा कि किसी भी आरोपी को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन यह सवाल उठता है कि नेपाल और नागपुर में श्रद्धा की मदद किसने की। उन्होंने पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग और लाइ डिटेक्टर टेस्ट की जरूरत बताई।
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