तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संकेत दिया है कि पार्टी के टूट से जुड़े सांसदों पर कोई भी फैसला सभी पक्षों को सुनने के बाद ही लिया जाएगा। उनके कार्यालय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थक टीएमसी सांसदों को बैठक में शामिल होकर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा है।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब लगभग 20 टीएमसी सांसदों के एक धड़े ने स्पीकर से मुलाकात कर अपने समूह को मान्यता देने और उसके नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में विलय की मांग करते हुए पत्र सौंपा। स्पीकर अब इस मामले में दोनों पक्षों—मूल पार्टी नेतृत्व और टूटे हुए धड़े—की सुनवाई करेंगे। साथ ही इस पूरे मामले पर कानूनी राय भी ली जा सकती है। माना जा रहा है कि यह निर्णय संसद के मानसून सत्र से पहले लिया जा सकता है।
टीएमसी में यह विभाजन केवल लोकसभा तक सीमित नहीं है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी स्थिति बदलती दिख रही है, जहां ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 64 विधायकों का एक अलग धड़ा सक्रिय बताया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें कथित तौर पर विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी है।
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लोकसभा में इस टूटे हुए समूह का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं, जिन्होंने अपने धड़े को औपचारिक मान्यता देने की मांग की है। दूसरी ओर, पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को पत्र लिखकर इस धड़े को मान्यता न देने की अपील की है। काकोली घोष दस्तीदार ने पहले ही संकेत दिया था कि उनका धड़ा एनडीए का समर्थन कर सकता है।
राज्यसभा में भी टीएमसी को झटका लगा है, जहां चार सांसद पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। इससे पार्टी की संसदीय ताकत कमजोर होती दिख रही है।
वहीं, पार्टी के प्रतीक और संपत्तियों पर भी विवाद की संभावना बढ़ गई है। सुदीप बंद्योपाध्याय ने संकेत दिया है कि स्पीकर के फैसले के बाद कानूनी लड़ाई लड़ी जा सकती है।
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