स्विट्जरलैंड में चल रही ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता उस समय बड़े संकट में आ गई जब ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अचानक बैठक स्थल छोड़ दिया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक कड़ी चेतावनी ने पूरे कूटनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। इसके बाद ईरानी अधिकारी बैठक से बाहर जाते हुए दिखाई दिए, जबकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कमरे में मौजूद थे।
यह वार्ता मध्य पूर्व में तनाव कम करने के उद्देश्य से 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत आयोजित की गई थी। चर्चा में लेबनान में संघर्षविराम बनाए रखने, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित परमाणु समझौते जैसे अहम मुद्दे शामिल थे। दोनों पक्ष क्षेत्रीय स्थिरता के लिए तकनीकी और राजनीतिक उपायों पर विचार कर रहे थे।
वार्ता के दौरान लेबनान की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां दक्षिणी क्षेत्रों में जारी सैन्य गतिविधियों के बीच संघर्षविराम को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा हुई। हालांकि, बैठक से पहले एक प्रतीकात्मक हैंडशेक और संयुक्त फोटो का कार्यक्रम रखा गया था, जिसे ईरानी प्रतिनिधियों ने अस्वीकार कर दिया।
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ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर ग़ालीबाफ मौजूद थे। इसमें देखा गया कि अराघची ने अमेरिकी प्रतिनिधियों से हाथ मिलाने के बजाय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की और फिर बैठक छोड़ दी।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को लेबनान में हिज़्बुल्लाह की गतिविधियों पर रोक लगाने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ऐसा नहीं करता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप के बयान के बाद ईरान ने दावा किया कि प्रतिनिधिमंडल का बाहर जाना इसी चेतावनी के विरोध में था। हालांकि आधिकारिक रूप से वार्ता के पूरी तरह टूटने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने कूटनीतिक प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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