संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने अल-कायदा के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बारे में गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अल-कायदा के सदस्य अब 25,000 तक पहुंच चुके हैं, जो 9/11 हमलों के दौरान 5,000 से भी कम थे। यह संख्या अब पहले के मुकाबले 50 गुना अधिक है। यह संगठन अफ्रीका, पश्चिम एशिया और अफगानिस्तान में सक्रिय होकर अपनी गतिविधियों को बढ़ा रहा है, साथ ही युवा लोगों को भर्ती करने के लिए आक्रामक तरीके अपना रहा है।
यूएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अल-कायदा और उसके संबद्ध समूहों के पास वर्तमान में लगभग 25,000 फाइटर हैं। यह जानकारी विभिन्न खुफिया एजेंसियों से प्राप्त की गई है, जिसमें ब्रिटेन की MI6 भी शामिल है। यूएन ने यह भी स्पष्ट किया कि अल-कायदा अपने हमलों की योजना बना रहा है और उसका नेटवर्क अब एक ही जगह पर केंद्रित नहीं है, बल्कि यह अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कई क्षेत्रों में फैल चुका है, जिससे खतरा और भी जटिल हो गया है।
अल-कायदा की भर्ती की रणनीति में बदलाव आया है। अब संगठन न केवल बड़ी हमलों को अंजाम देने की क्षमता रखता है, बल्कि इस समय के सदस्य पिछली पीढ़ी से बहुत अलग हैं। वर्तमान सदस्य अक्सर विचारधारा से प्रेरित नहीं होते, बल्कि वे स्थानीय मुद्दों, गरीबी और वित्तीय प्रोत्साहन के कारण भर्ती होते हैं। इसके अलावा, आतंकवादी समूह अब बच्चों और युवा लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिन्हें आसानी से भड़काया जा सकता है।
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अफगानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण के बाद, यह देश अल-कायदा के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है। यहां अब यह संगठन नए भर्ती और प्रशिक्षण का केंद्र बन चुका है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा का भारतीय उपमहाद्वीप शाखा (AQIS) अभी भी सक्रिय है।
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