विश्व आर्थिक मंच (डावोस) में इस बार अमेरिका का दबदबा साफ नजर आने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के साथ ही डावोस एक तरह से “अमेरिका-प्रधान” मंच बनता दिख रहा है। एस4 कैपिटल के कार्यकारी चेयरमैन और डब्ल्यूपीपी के संस्थापक सर मार्टिन सोरेल का कहना है कि ट्रंप की मौजूदगी ने यूरोप को ग्रीनलैंड से लेकर भू-राजनीतिक मुद्दों तक कई मोर्चों पर असहज कर दिया है।
सोरेल ने कहा कि ट्रंप ने “यूरोपीय संघ के बीच बिल्ली छोड़ दी है”, यहां तक कि “ग्रीनलैंड वाली बिल्ली भी”, जिससे यूरोप में हलचल मच गई है। उनके मुताबिक, इस बार डावोस में अमेरिकी एजेंडा सबसे ऊपर रहेगा और यही सबसे बड़ी खबर बनेगा।
सोरेल ने बताया कि अमेरिका की भागीदारी इस बार अभूतपूर्व है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल डावोस पहुंचा है, जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, बड़े उद्योगपति और प्रमुख कारोबारी नेता शामिल हैं। लैरी फिंक चेयरमैन हैं और अमेरिका की मौजूदगी गांव के चर्च से भी बाहर निकलकर पूरे मंच पर छा गई है।
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उन्होंने ट्रंप की रणनीति को “जानबूझकर दी गई शॉक थैरेपी” बताया। सोरेल के अनुसार, ट्रंप पहले जानबूझकर बेहद कठोर रुख अपनाते हैं और फिर उससे कुछ कम पर समझौता करते हैं। ग्रीनलैंड के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उसके भौगोलिक महत्व और रूस व चीन की दिलचस्पी को देखते हुए यह रणनीतिक रूप से अहम है।
सोरेल ने चीन और रूस की आर्कटिक गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश इस क्षेत्र में तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, जिससे पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ी है। इन हालातों में डावोस में भू-राजनीति, सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी दृष्टिकोण का दबदबा दिखने की पूरी संभावना है।
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