अमेरिका में कोविड-19 महामारी से निपटने के तरीके को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण सीनेट सुनवाई के दौरान प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फाउची ने अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन (फिफ्थ अमेंडमेंट) का सहारा लेते हुए कई सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया। यह सुनवाई रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व वाली सीनेट समिति के समक्ष हुई।
डॉ. फाउची को केंटकी से रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल ने शपथ के तहत गवाही देने के लिए समन जारी किया था। रैंड पॉल और फाउची के बीच कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई नीतियों को लेकर लंबे समय से मतभेद और सार्वजनिक विवाद रहे हैं।
सुनवाई के दौरान डॉ. फाउची ने दर्जनों सवालों पर बार-बार पांचवें संशोधन का हवाला दिया। अमेरिकी संविधान का यह प्रावधान किसी व्यक्ति को ऐसे सवालों का जवाब देने से बचने का अधिकार देता है, जिनसे उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की संभावना उत्पन्न हो सकती हो।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से फिलहाल डॉ. फाउची ने उन सवालों का जवाब देने से परहेज किया है, जिनके आधार पर उन पर शपथ के तहत गलत बयान देने (परजरी) के आरोप लग सकते थे।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 की शुरुआत में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जो बाइडेन ने डॉ. फाउची को क्षमादान (पार्डन) दिया था। हालांकि, कुछ रिपब्लिकन नेताओं का दावा है कि यदि इस सुनवाई के दौरान उन्होंने शपथ के तहत गलत जानकारी दी होती, तो उनके खिलाफ नई कानूनी कार्रवाई संभव हो सकती थी।
कोविड-19 महामारी के दौरान अमेरिका की स्वास्थ्य नीति में डॉ. फाउची की प्रमुख भूमिका रही थी। महामारी से जुड़े फैसलों और वैज्ञानिक सलाह को लेकर वह लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। रिपब्लिकन सांसद लंबे समय से उनके फैसलों और महामारी प्रबंधन की जांच की मांग करते रहे हैं, जबकि डेमोक्रेटिक नेताओं ने उनके वैज्ञानिक योगदान का समर्थन किया है।
फिलहाल इस सुनवाई के बाद भी कोविड-19 महामारी से जुड़े सरकारी निर्णयों और जिम्मेदारियों पर अमेरिका में राजनीतिक बहस जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।
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