एप्पल इंक (Apple Inc.) के 50 साल पूरे होने के अवसर पर कंपनी के भारत में सफर और प्रभाव को लेकर एक पुरानी उपयोगकर्ता की कहानी सामने आई है, जो बताती है कि कैसे यह ब्रांड भारत में तकनीक, पसंद और महत्वाकांक्षा का प्रतीक बन गया।
2004 में लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से खरीदा गया एक iPod Mini इस उपयोगकर्ता का पहला एप्पल उत्पाद था। भारत लौटने के बाद यह छोटा सा डिजिटल म्यूजिक प्लेयर उनके 20 वर्षीय दोस्तों के बीच चर्चा का विषय बन गया। उस समय यह केवल एक गैजेट नहीं, बल्कि “कूल” होने का प्रतीक माना जाता था।
मुंबई जैसे शहरों में युवा इसे एक लाइफस्टाइल स्टेटस के रूप में देखते थे, जैसा कि कैलिफोर्निया के पॉप स्टार्स MTV पर iPod के साथ दिखाई देते थे। इसी दौर में यह उपयोगकर्ता एप्पल के ब्रांड से गहराई से जुड़ गया और धीरे-धीरे इसके “फैन” बन गए।
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हालांकि 1990 के दशक के अंत में भारत में मैकबुक उपलब्ध थे, लेकिन वे काफी महंगे थे और ज्यादातर थर्ड पार्टी डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए ही मिलते थे।
भारत में एप्पल का पहला आधिकारिक बड़ा कदम अगस्त 2008 में iPhone 3G के लॉन्च के साथ आया। यह लॉन्च एयरटेल और वोडाफोन के जरिए हुआ था। उस समय इसकी कीमत लगभग 31,000 से 36,000 रुपये के बीच थी, जो एक मोबाइल फोन के लिए काफी महंगी मानी जाती थी।
इसके बावजूद iPhone ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाई और धीरे-धीरे यह एक निच (niche) ब्रांड से निकलकर एक प्रीमियम और स्टेटस सिंबल बन गया।
समय के साथ एप्पल ने भारत में अपनी रणनीति बदली और स्थानीय बाजार की जरूरतों के अनुसार खुद को ढाला, जिससे यह आज एक मजबूत और लोकप्रिय टेक ब्रांड बन चुका है।
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