भारत और बांग्लादेश के संबंधों को लेकर ढाका से आए हालिया बयानों ने दोनों देशों के रिश्तों में संभावित बदलाव के संकेत दिए हैं। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जिसके साथ ढाका अच्छे कामकाजी और द्विपक्षीय संबंध चाहता है। उनके बयान को दशकों पुराने रिश्ते को अधिक व्यावहारिक और लेन-देन आधारित स्वरूप देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
कबीर ने कहा कि बांग्लादेश को हर समय भारत के बारे में सोचने के बजाय अपने देश पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत उनके लिए एक अन्य देश है, जिसके साथ बांग्लादेश अच्छे संबंध चाहता है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में मौजूदगी दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। वहीं, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। भारत ने उन्हें द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण दिया है, लेकिन ढाका की ओर से अब तक सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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तारिक रहमान ने BRICS शिखर सम्मेलन का निमंत्रण भी स्वीकार नहीं किया। बांग्लादेश का कहना है कि उन्हें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि BIMSTEC के अध्यक्ष के तौर पर आमंत्रित किया गया था। ढाका चाहता है कि तारिक रहमान की पहली भारत यात्रा बहुपक्षीय कार्यक्रम के बजाय सीधे द्विपक्षीय संबंधों पर केंद्रित हो।
बांग्लादेश के संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद ने कहा कि शेख हसीना को भारत में रहने की अनुमति दिए जाने को लेकर ढाका की कुछ आपत्तियां हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन दोनों देशों के बीच संबंध संप्रभु देशों के बीच आपसी सम्मान पर आधारित होने चाहिए।
उन्होंने पुराने ‘पति-पत्नी’ जैसे रिश्ते की तुलना को भी खारिज करते हुए कहा कि बांग्लादेश ऐसा संबंध नहीं चाहता।
इस बीच, भारत दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए प्रयास जारी रखे हुए है। भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने लोगों और कारोबार के बीच संबंध मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीति अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन आम लोगों और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर सहयोग जरूरी है।
भारत का रुख है कि संबंधों को शेख हसीना के मुद्दे से आगे बढ़ाकर दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग पर केंद्रित किया जाना चाहिए।
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