दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बायनेंस (Binance) से हुई 6.3 अरब डॉलर (करीब 4.7 अरब पाउंड) की भारी-भरकम चोरी के पीछे उत्तर कोरिया समर्थित हैकिंग समूह का हाथ होने की आशंका जताई गई है। दो प्रमुख ब्लॉकचेन विश्लेषण कंपनियों, टीआरएम लैब्स (TRM Labs) और चेनएनालिसिस (Chainalysis) ने कहा है कि उनके पास ठोस सबूत हैं जो इस हमले को उत्तर कोरिया के "लाज़रस ग्रुप" की ओर इशारा करते हैं। इस समूह को "ट्रेडरट्रेटर" (TraderTraitor) के नाम से भी जाना जाता है। दोनों कंपनियों ने "उच्च विश्वास" के साथ इस समूह को संदिग्ध बताया है।
यह घटना उत्तर कोरिया से जुड़े साइबर हमलों की लंबी कड़ी का ताज़ा उदाहरण है। उत्तर कोरिया दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में शुमार है, जहां इंटरनेट की पहुंच बेहद सीमित है। विशेषज्ञों का आरोप है कि नेता किम जोंग उन के नेतृत्व वाली सरकार साइबर अपराध के जरिए अपने लिए धन जुटाती है, हालांकि प्योंगयांग लगातार इससे इनकार करता रहा है।
उत्तर कोरिया से जुड़ा सबसे चर्चित संदिग्ध हमला 2014 में सोनी पिक्चर्स पर हुआ था, जिसने फिल्म "द इंटरव्यू" बनाई थी। इस फिल्म में किम जोंग उन की हत्या की साजिश दिखाई गई थी। इस हैक में स्टूडियो के शीर्ष अधिकारियों के बीच हुए हजारों शर्मनाक ईमेल सार्वजनिक हो गए थे।
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पिछले साल अमेरिकी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने कहा था कि बायबिट (Bybit) एक्सचेंज से 1.5 अरब डॉलर की चोरी के लिए उत्तर कोरिया जिम्मेदार था। उस घटना के बाद एजेंसी ने बताया था कि ट्रेडरट्रेटर ने चोरी की गई संपत्ति को तेजी से बिटकॉइन और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों में बदलकर उसे वैध मुद्रा में बदलने की कोशिश की थी। एफबीआई ने उत्तर कोरिया पर व्यापक रूप से "अवैध साइबर अपराध और आभासी संपत्ति चोरी गतिविधियों" में लिप्त होने का आरोप लगाया है।
रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर कोरिया ने व्यवस्थित तरीके से अपनी साइबर क्षमताओं का विकास किया है, जिसमें विश्वविद्यालयों से होनहार छात्रों की भर्ती कर उन्हें खुफिया एजेंसी की निगरानी वाले हैकर समूहों में शामिल किया जाता है। तकनीकी समूहों के विश्लेषण के मुताबिक, इसमें से कुछ साइबरयुद्ध गतिविधियां उत्तर कोरिया की सीमा से सटे चीन में भी होती हैं। उत्तर कोरियाई हैकरों पर 2022 में 62 करोड़ डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी चोरी का भी संदेह है।
ताज़ा मामले में आरोप है कि उत्तर कोरियाई एजेंटों ने विशेष अधिकार का इस्तेमाल कर बायनेंस के एक "हॉट वॉलेट" को, जो इंटरनेट से जुड़ा होता है, ऐसा बना दिया कि उससे धन स्वतः ही हमलावर के पास स्थानांतरित होने लगा। टीआरएम का कहना है कि हमलावर ने इस योजना के तहत बायनेंस के हॉट वॉलेट साइनिंग सिस्टम तक पहुंच बनाई होगी।
बायनेंस ने इस घटना के उत्तर कोरिया से संभावित संबंध पर सीधे जवाब नहीं दिया है। कंपनी ने पहले कहा था कि उसे लगता है कि एक इंजीनियर का लैपटॉप हैक हुआ था, जिससे अनधिकृत निकासी संभव हुई, लेकिन बाद में उसने कहा कि यह हमला कहीं बड़ा था। बायनेंस के सह-सीईओ रिचर्ड टेंग ने कहा, "हमारी आगे की जांच में सेंधमारी के अतिरिक्त बिंदु सामने आए हैं।" कंपनी के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि चोरी की गई लगभग 80 प्रतिशत संपत्ति सुरक्षित कर ली गई है, लेकिन बाकी का अभी पता नहीं चल पाया है।
अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह रिकॉर्ड-तोड़ चोरी दिखाती है कि संदिग्ध उत्तर कोरियाई हैकर कितने शक्तिशाली हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उभार ने भी अपराधियों को ऑटोमेशन और अन्य तरीकों से अपराध करने के नए रास्ते दिए हैं। इस मामले में भी संभव है कि बायनेंस की प्रणाली में सेंध लगाने के लिए एआई का इस्तेमाल किया गया हो। चेनएनालिसिस के अनुसार, हमलावर ने ऐसे लॉन्ड्रिंग पैटर्न अपनाए जो "पहले कभी नहीं देखे गए।"
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