मणिपुर में निर्वाचित सरकार की बहाली के संकेत और मजबूत हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संसदीय बोर्ड ने सोमवार (2 फरवरी 2026) को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को मणिपुर में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है, जब राज्य में लंबे समय से राष्ट्रपति शासन लागू है और राजनीतिक गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है।
इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने कूकी-जो विद्रोही समूहों के साथ एक अहम बैठक बुलाई है। इस कदम को भी मणिपुर में राजनीतिक समाधान और निर्वाचित सरकार की बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक राज्य में शांति बहाली और राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है।
पिछले दो दिनों के दौरान भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मणिपुर से पार्टी के सभी विधायकों और सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों को नई दिल्ली बुलाया था। इस बैठक को राज्य में अगली राजनीतिक रणनीति और नेतृत्व को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि विधायक दल के नेता के चयन के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
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गौरतलब है कि मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। इसके साथ ही राज्य विधानसभा को निलंबित अवस्था (सस्पेंडेड एनिमेशन) में रखा गया था। तब से लेकर अब तक राज्य प्रशासन केंद्र के नियंत्रण में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा द्वारा पर्यवेक्षक की नियुक्ति और केंद्र सरकार की सक्रियता इस बात का संकेत है कि मणिपुर में जल्द ही निर्वाचित सरकार की वापसी हो सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला राजनीतिक सहमति और हालात पर निर्भर करेगा। फिलहाल राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
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