लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मनुस्मृति और महिलाओं के अधिकारों को लेकर की गई टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं। महाराष्ट्र में छात्राओं से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने ‘मनुस्मृति की मानसिकता’ का विरोध करते हुए पितृसत्ता को खत्म करने का आह्वान किया था।
राहुल गांधी ने छात्राओं से कहा था कि उन्हें पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और इसे खत्म करने के लिए संघर्ष करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं अपने पिता, पति या बेटे की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि उनका अपना स्वतंत्र अस्तित्व है।
राहुल गांधी की इन टिप्पणियों के बाद बीजेपी नेताओं ने मनुस्मृति को लेकर उनके रुख पर सवाल उठाए। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने मनुस्मृति के दो श्लोकों का उल्लेख किया और दावा किया कि इनमें महिलाओं के सम्मान पर जोर दिया गया है।
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दुबे ने राहुल गांधी की टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मनुस्मृति को लेकर चर्चा करते समय उसके विभिन्न संदर्भों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने उन श्लोकों का हवाला दिया जिनमें महिलाओं के सम्मान और उनके महत्व की बात कही गई है।
वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी पर महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे को हिंदू धर्म को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
सरमा ने राहुल गांधी से यह भी सवाल किया कि उन्होंने कथित तौर पर शरीयत के तहत मौजूद “पितृसत्तात्मक और मध्ययुगीन प्रथाओं” के खिलाफ कितनी बार आवाज उठाई है।
बीजेपी नेताओं की टिप्पणियों के बाद मनुस्मृति, महिला अधिकार और पितृसत्ता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी लंबे समय से सामाजिक समानता, जातिगत भेदभाव और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को अपने राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाते रहे हैं।
महाराष्ट्र में छात्राओं के साथ उनकी हालिया बातचीत में भी उन्होंने महिलाओं को अपने अधिकारों और स्वतंत्र पहचान के लिए खड़े होने का संदेश दिया। वहीं, बीजेपी नेताओं ने उनके बयान को राजनीतिक और धार्मिक संदर्भ में चुनौती दी है।
इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
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