नेपाल-तिब्बत में ग्लेशियर से जुड़ी आपदा के बाद एक बार फिर सवाल उठा है कि क्या तकनीक प्राकृतिक आपदाओं के आने से पहले उनके संकेत पहचान सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक हर आपदा की सटीक भविष्यवाणी संभव नहीं है, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उपग्रह, सेंसर और स्मार्टफोन की मदद से खतरे का पहले पता लगाकर लोगों को समय रहते चेतावनी दी जा सकती है।
आज शोधकर्ता और आपदा प्रबंधन एजेंसियां एआई, मशीन लर्निंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली का इस्तेमाल कर रही हैं। उपग्रहों, मौसम केंद्रों, नदियों के जलस्तर मापने वाले उपकरणों, भूकंपीय सेंसर और पुराने रिकॉर्ड से बड़ी मात्रा में डेटा जुटाया जाता है। एआई इस डेटा का तेजी से विश्लेषण कर ऐसे पैटर्न खोज सकता है जिन्हें इंसान आसानी से नहीं पहचान पाते।
बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी
बाढ़ के मामले में एआई बारिश के पूर्वानुमान, नदी के जलस्तर और अन्य आंकड़ों का विश्लेषण कर संभावित जोखिम वाले इलाकों की पहचान कर सकता है। चक्रवातों पर उपग्रह और मौसम रडार लगातार नजर रखते हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।
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पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी उपग्रह तस्वीरों, बारिश के आंकड़ों और जमीन में लगे सेंसरों के जरिए पहचाना जा सकता है। हालांकि भूकंप की सटीक भविष्यवाणी अभी भी संभव नहीं है। फिर भी भूकंपीय तकनीक शुरुआती कंपन का पता लगाकर बड़े झटकों से कुछ सेकंड पहले चेतावनी जारी कर सकती है।
उपग्रह और सेंसर की अहम भूमिका
उपग्रह दूर-दराज के विशाल क्षेत्रों पर नजर रखने में मदद करते हैं, जबकि जमीन पर लगे सेंसर बारिश, नदी के जलस्तर, मिट्टी की हलचल और कंपन की निगरानी करते हैं। इन सभी सूचनाओं को एआई से जोड़कर तेज और प्रभावी चेतावनी प्रणाली बनाई जा सकती है।
स्मार्टफोन बन रहे नई चेतावनी प्रणाली
सरकार और आपातकालीन सेवाएं मोबाइल फोन पर सीधे चेतावनी भेज सकती हैं। लोगों को अपने फोन में आपातकालीन सूचनाएं चालू रखनी चाहिए और फोन को चार्ज रखना चाहिए। पावर बैंक और जरूरी आपातकालीन नंबर भी साथ रखना उपयोगी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक केवल मदद कर सकती है, अंतिम निर्णय लोगों को ही लेना होगा। आपदा की चेतावनी मिलने पर स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का तुरंत पालन करना चाहिए। भविष्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था का लक्ष्य पूर्ण भविष्यवाणी नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए लोगों को सुरक्षित निकलने के लिए कुछ अतिरिक्त समय देना है।
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