कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने देश की नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रणनीति की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कनाडा ने इस अत्याधुनिक तकनीक को तेजी से अपनाने और अपनी घरेलू क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान नहीं दिया, तो यह तकनीक भविष्य में देश के खिलाफ “हथियार” की तरह इस्तेमाल की जा सकती है।
प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि कनाडा में एआई तकनीक को अपनाने की गति धीमी रही है, जिसके कारण देश कई तरह के जोखिमों का सामना कर सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि कनाडा अपनी तकनीकी क्षमता को बढ़ाए और विदेशी निर्भरता को कम करे।
इस नई रणनीति का एक प्रमुख उद्देश्य कनाडा की संयुक्त राज्य अमेरिका पर निर्भरता को कम करना भी है। कार्नी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार चाहती है कि देश तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने और महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे पर विदेशी नियंत्रण सीमित हो।
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उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी बड़ी टेक कंपनियों के प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि वैश्विक स्तर पर एआई के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा आवश्यक है।
नई एआई रणनीति के तहत कनाडा सरकार स्थानीय नवाचार, अनुसंधान और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। इसके साथ ही शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि देश में कुशल एआई विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कनाडा को वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद कर सकता है, लेकिन इसके लिए लंबी अवधि में बड़े निवेश और नीति सुधारों की आवश्यकता होगी।
प्रधानमंत्री कार्नी की यह घोषणा ऐसे समय आई है जब पूरी दुनिया में एआई तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और देश अपनी डिजिटल संप्रभुता को सुरक्षित रखने के प्रयासों में जुटे हुए हैं।
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