ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो (NSB) की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में चीन द्वारा ताइवान के अहम बुनियादी ढांचे—जिनमें अस्पताल, बैंक, ऊर्जा क्षेत्र और दूरसंचार नेटवर्क शामिल हैं—पर किए गए साइबर हमले तेज़ी से बढ़े। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में औसतन प्रतिदिन 26.3 लाख साइबर हमले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6% अधिक हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 की तुलना में 2025 में दैनिक हमलों की औसत संख्या में 113% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वही वर्ष था जब ताइवान ने पहली बार ऐसे आंकड़े सार्वजनिक रूप से जारी करना शुरू किया था। ऊर्जा, आपातकालीन बचाव सेवाएं और अस्पताल ऐसे क्षेत्र रहे, जहां साल-दर-साल सबसे अधिक वृद्धि देखी गई।
राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो ने कहा कि कई साइबर हमले चीन की सैन्य गतिविधियों के साथ तालमेल में किए गए, जिन्हें “हाइब्रिड खतरे” बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने 40 संयुक्त सैन्य तत्परता गश्त (Joint Combat Readiness Patrols) कीं, जिनमें से 23 मौकों पर साइबर हमलों की तीव्रता भी बढ़ गई।
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इसके अलावा, राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर भी साइबर गतिविधियों में उछाल देखा गया। मई में राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के पहले कार्यकाल वर्ष पर दिए गए भाषण और नवंबर में उपराष्ट्रपति शियाओ बी-खिम के यूरोपीय संसद में संबोधन के दौरान भी साइबर हमले तेज़ हुए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इन साइबर हमलों के जरिए ताइवान की सरकारी और सामाजिक व्यवस्थाओं को बाधित या पंगु बनाने की कोशिश कर रहा है। इन हमलों में डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल-ऑफ-सर्विस (DDoS) हमले, मैन-इन-द-मिडल अटैक और सूचना चोरी जैसी तकनीकें शामिल थीं।
सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े विज्ञान पार्क, जहां TSMC जैसी कंपनियां स्थित हैं, भी प्रमुख निशाने पर रहे। रिपोर्ट का दावा है कि यह कदम चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता और अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है।
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