कांगो में राजधानी किंशासा के पास इबोला की आशंका के चलते क्वारंटीन की गई नदी नाव में सवार किसी भी यात्री में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार, 8 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी। इसके बाद राजधानी में दुर्लभ बुंडिबुग्यो वायरस के संभावित प्रसार को लेकर बनी चिंता कुछ कम हुई है।
अधिकारियों के अनुसार, 6 अगस्त को मालुकू बंदरगाह पर 200 से अधिक नाव यात्रियों को एहतियातन क्वारंटीन किया गया था। यह स्थान कांगो की राजधानी किंशासा से करीब 65 किलोमीटर दूर है। कार्रवाई उस समय की गई, जब नाव पर पहले यात्रा कर चुके एक यात्री की मौत ऐसे लक्षणों के साथ हुई, जो इबोला वायरस संक्रमण से मेल खाते थे।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने नाव में मौजूद यात्रियों की निगरानी और जांच शुरू की। क्वारंटीन का उद्देश्य संभावित संक्रमण को फैलने से रोकना और यात्रियों में बीमारी के किसी भी संकेत की पहचान करना था।
और पढ़ें: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए सीएम सम्राट चौधरी ने घोषित किए नए कदम
जांच के बाद अधिकारियों ने पुष्टि की कि क्वारंटीन किए गए यात्रियों में अब तक इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है। इस घोषणा से किंशासा में संक्रमण फैलने की आशंका को लेकर बनी चिंता को राहत मिली है।
बुंडिबुग्यो वायरस इबोला वायरस रोग पैदा करने वाले वायरसों में से एक है और इसके संक्रमण में गंभीर बीमारी हो सकती है। इसलिए संदिग्ध मामलों की पहचान होने पर स्वास्थ्य अधिकारी आमतौर पर संपर्क में आए लोगों की निगरानी और उन्हें अलग रखने जैसे कदम उठाते हैं।
कांगो में स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। नाव से जुड़े यात्रियों और अन्य संभावित संपर्कों की निगरानी आगे भी जारी रहने की उम्मीद है, ताकि किसी नए संदिग्ध मामले का समय रहते पता लगाया जा सके और संक्रमण की स्थिति में तत्काल कदम उठाए जा सकें।
और पढ़ें: आरजी Kar रेप-मर्डर केस में बंगाल सरकार का बड़ा फैसला, सुवेंदु अधिकारी ने नए सिरे से जांच के दिए आदेश