कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब इकाई को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, नेताओं को चेतावनी दी गई है कि वे आंतरिक मतभेदों और मुद्दों को मीडिया या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उठाने से बचें और ऐसे सभी मामलों को केवल पार्टी हाईकमान के समक्ष ही रखें। केंद्रीय नेतृत्व ने यह भी साफ कर दिया कि पंजाब में फिलहाल किसी भी तरह के नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल नहीं है।
यह सख्त निर्देश गुरुवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में दिए गए, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर करीब तीन घंटे तक चली। बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे। इस बैठक में पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को बुलाया गया था।
दरअसल, हाल के दिनों में पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी और आपसी मतभेदों की खबरें सामने आ रही थीं, जिससे पार्टी नेतृत्व चिंतित था। सूत्रों के अनुसार, कुछ नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों और मीडिया में पार्टी के आंतरिक मुद्दों को उठाने पर हाईकमान ने नाराजगी जताई। इसी के मद्देनज़र केंद्रीय नेतृत्व ने यह स्पष्ट किया कि अनुशासनहीनता और सार्वजनिक बयानबाज़ी से पार्टी को नुकसान पहुंचता है।
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पंजाब में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस राज्य में आम आदमी पार्टी से सत्ता वापस हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। हाईकमान का मानना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक एकता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका सीधा असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।
बैठक में यह भी संकेत दिया गया कि पार्टी नेताओं को आपसी मतभेद भुलाकर जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व ने उम्मीद जताई कि पंजाब इकाई अनुशासन में रहकर सामूहिक रूप से पार्टी के हित में काम करेगी।
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