ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। संघर्ष के तेज होने के बीच मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का दाम सोमवार को बढ़कर 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो वर्ष 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं अमेरिका में उत्पादित वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी एक समय 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
हालांकि सोमवार देर रात कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, लेकिन यह अभी भी उस स्तर से काफी अधिक है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। युद्ध अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसका असर तेल और गैस के उत्पादन तथा परिवहन से जुड़ी वैश्विक व्यवस्था पर पड़ रहा है।
युद्ध के बीच ईरान ने अयातुल्लाह मोजतबा ख़ामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि देश दबाव के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं है। वहीं हमलों की आशंका के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है। यह संकीर्ण समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देशों—इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात—ने निर्यात में बाधा और भंडारण की कमी के कारण उत्पादन घटा दिया है। युद्ध के दौरान ईरान, इजरायल और अमेरिका द्वारा कई तेल और गैस ठिकानों पर हमले भी किए गए हैं, जिससे आपूर्ति संकट और गहरा गया है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति 1973 और 1979 के तेल संकट से भी अधिक बड़ा आपूर्ति झटका बन सकती है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक पड़ सकता है।
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