गुरुवार, 8 जनवरी 2025 को दिल्ली विधानसभा में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक-दूसरे पर सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर के अपमान का आरोप लगाया। दोनों दलों के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
आम आदमी पार्टी के विधायकों ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार में कानून मंत्री कपिल मिश्रा और कुछ भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री आतिशी के एक कथित बयान का “संपादित वीडियो” सोशल मीडिया पर साझा किया है। AAP का कहना है कि इस वीडियो के जरिए गुरु तेग बहादुर के प्रति अपमानजनक टिप्पणी दिखाने की कोशिश की गई, जबकि ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया था। इसी आधार पर AAP विधायकों ने कपिल मिश्रा और वीडियो को दोबारा साझा करने वाले सभी भाजपा विधायकों को निलंबित करने की मांग की।
वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आतिशी की टिप्पणी से सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है और AAP इस मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। भाजपा विधायकों ने भी सदन में विरोध प्रदर्शन किया और माफी की मांग की।
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लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण विधानसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। अंततः विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने स्थिति को संभालते हुए आतिशी द्वारा दिए गए कथित बयान के मामले को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति (कमेटी ऑफ प्रिविलेजेज) के पास भेजने का फैसला किया।
अध्यक्ष ने कहा कि समिति पूरे मामले की जांच करेगी और तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। उन्होंने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और संवेदनशील धार्मिक मुद्दों पर संयम बरतने की अपील की।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली की राजनीति पहले से ही तीखे आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर रही है। गुरु तेग बहादुर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक व्यक्तित्व से जुड़े मुद्दे पर विवाद ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।
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