नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने लंबी दूरी की उड़ानों के लिए पायलटों के फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों में अस्थायी छूट देने की घोषणा की। यह निर्णय उड़ानों के सुचारु संचालन और पायलटों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असांगबा चुबा आओ ने बताया कि यह कदम एयरलाइंस के संचालन को बेहतर बनाने और लंबी दूरी की उड़ानों में किसी प्रकार की बाधा से बचने के लिए उठाया गया है।
हाल ही में डीजीसीए ने वीआईपी और वीवीआईपी यात्रियों—जैसे मुख्यमंत्री और राज्यपाल—को ले जाने वाली उड़ानों के लिए भी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पायलट और क्रू पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं डाला जाना चाहिए, जिससे उड़ान सुरक्षा प्रभावित हो।
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डीजीसीए ने यह भी कहा कि सभी उड़ान संचालन एयरक्राफ्ट रूल्स और समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार ही होने चाहिए। किसी भी वीआईपी आवश्यकता के कारण अंतिम समय में बदलाव केवल प्रबंधन के माध्यम से किए जाएं, सीधे पायलट या क्रू से नहीं।
यह दिशा-निर्देश जनवरी में हुए एक विमान हादसे के बाद आए हैं, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार सहित अन्य लोगों की मौत हुई थी।
डीजीसीए ने कहा कि चुनावी उड़ानों और अस्थायी हेलीपैड से जुड़े पिछले हादसों के विश्लेषण में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन सामने आए हैं। इसलिए सभी ऑपरेटरों को उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
इसके तहत प्रत्येक ऑपरेटर को एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो सभी निर्देशों के पालन की निगरानी करेगा। वीवीआईपी उड़ानों के लिए पायलट के पास कम से कम 3000 घंटे (विमान) और 2000 घंटे (हेलीकॉप्टर) का अनुभव होना आवश्यक होगा।
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