यूरोपीय आयोग ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों और सांसदों से ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री से निपटने के लिए नए नियमों पर तेजी से काम करने की अपील की है। आयोग ने चेतावनी दी कि मौजूदा कानून समाप्त हो जाने के बाद इस क्षेत्र में एक गंभीर कानूनी खामी पैदा हो गई है।
दरअसल, एक विशेष कानूनी प्रावधान, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग सेवाओं को स्वेच्छा से आपत्तिजनक सामग्री की पहचान करने और रिपोर्ट करने की अनुमति देता था, 3 अप्रैल को समाप्त हो गया। इसके स्थान पर नया कानून अभी तक लागू नहीं हो सका है, जिससे बाल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इस बीच, प्रमुख टेक कंपनियों जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और स्नैपचैट ने एक पत्र में कहा है कि वे आवश्यक होने पर संदेशों की निगरानी जारी रखेंगी और बाल शोषण से संबंधित सामग्री के खिलाफ स्वैच्छिक कार्रवाई करती रहेंगी।
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हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्वैच्छिक कदम पर्याप्त नहीं हैं और मजबूत कानूनी ढांचे की आवश्यकता है। यूरोपीय संसद और सदस्य देशों के बीच नए नियमों को लेकर मतभेद के कारण इस प्रक्रिया में देरी हो रही है।
यूरोपीय आयोग ने कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर देरी से बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। आयोग ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि वे मतभेदों को जल्द सुलझाएं और एक मजबूत तथा प्रभावी कानून लागू करें, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री को रोका जा सके।
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