यातनाओं और निर्वासन का दर्द झेल चुके इराक के पूर्व राष्ट्रपति बारहम सालिह ने वर्ष की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) की कमान संभाल ली है। 65 वर्षीय सालिह इस पद पर पहुंचने वाले पहले पूर्व राष्ट्राध्यक्ष हैं। ऐसे समय में उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली है, जब दुनिया भर में शरणार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और UNHCR गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है।
अपने नए पद पर पहली यात्रा के दौरान केन्या के काकुमा शरणार्थी शिविर पहुंचे सालिह ने कहा, “यह एक गहरी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। मैं जानता हूं कि घर और अपनों को खोने का दर्द क्या होता है।” काकुमा शिविर पूर्वी अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर है, जहां दक्षिण सूडान, सोमालिया, युगांडा और बुरुंडी से आए करीब तीन लाख लोग रह रहे हैं। यह शिविर 1992 से अस्तित्व में है।
सालिह ने कहा कि दुनिया को शरणार्थियों की इस स्थिति को यूं ही जारी नहीं रहने देना चाहिए। उन्होंने केन्या की उस पहल की सराहना की, जिसमें शरणार्थी शिविरों को आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उनका कहना था कि केवल शरणार्थियों की रक्षा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें स्थायी समाधान और सम्मानजनक जीवन के अवसर भी देने होंगे।
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1960 में कुर्द बहुल सुलेमानियाह में जन्मे सालिह एक न्यायाधीश और महिला अधिकार कार्यकर्ता के बेटे हैं। 1974 में उन्हें ईरान में शरण लेनी पड़ी। 1979 में इराक लौटने पर सद्दाम हुसैन की सरकार ने उन्हें दो बार गिरफ्तार किया और यातनाएं दीं। रिहा होने के बाद वे परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए, जहां उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की।
UNHCR के अनुसार, बीते एक दशक में शरणार्थियों की संख्या बढ़कर 11.7 करोड़ हो गई है, जबकि फंडिंग में भारी गिरावट आई है। सालिह ने माना कि एजेंसी को गंभीर बजट कटौती का सामना करना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शरणार्थियों के प्रति अपनी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियों को निभाना होगा।
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