केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि विकसित भारत ऊर्जा फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी जी-राम-जी, किसी अनुमान पर नहीं बल्कि साक्ष्य और अनुभव पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह मिशन ग्रामीण भारत से जुड़ी नीतियों पर सरकार की पारदर्शी और जिम्मेदार संवाद की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार का दायित्व है कि वह तथ्यों को स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखे, विशेषकर तब जब योजनाएं सीधे गांवों, आजीविका और देश के दीर्घकालिक भविष्य को प्रभावित करती हों। उन्होंने बताया कि जी-राम-जी को डिजिटल रूप से शासित, विस्तारित और परिणामोन्मुखी ढांचे के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें पूर्व सार्वजनिक रोजगार कार्यक्रमों से मिले अनुभवों को शामिल किया गया है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस मिशन में जीपीएस आधारित निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडल और रियल-टाइम डेटा का उपयोग किया जाएगा, जिससे कार्यों और धन के उपयोग पर सतत निगरानी संभव होगी। यह डिजिटल शासन प्रणाली फर्जी जॉब कार्ड, धन की हेराफेरी और लीकेज को रोकने में मदद करेगी, जिससे वास्तविक ग्रामीण श्रमिकों तक लाभ पहुंचेगा।
और पढ़ें: जीन ड्रेज़ का आरोप: केंद्र VB G-Ram-G योजना के जरिए मनरेगा को कमजोर करना चाहता है
उन्होंने मिशन की समन्वित योजना प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जी-राम-जी विभिन्न सार्वजनिक कार्यों को एक साथ जोड़ता है, जो पहले अलग-अलग ढंग से संचालित होते थे। इससे दोहराव रोका जाएगा, संसाधनों का दुरुपयोग रुकेगा और टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण होगा। जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा और कृषि श्रम की उपलब्धता जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, और प्रत्येक परियोजना को स्पष्ट परिणामों से जोड़ा गया है।
मंत्री ने बताया कि मिशन के तहत गारंटीकृत मजदूरी रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 कर दिया गया है। साथ ही मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जाएगा, जिससे ग्रामीण श्रमिकों की आय में स्थिरता आएगी।
वित्तीय अनुशासन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जी-राम-जी में मांग आधारित खुले मॉडल के बजाय राज्यवार वस्तुनिष्ठ मानकों पर आधारित आवंटन व्यवस्था अपनाई गई है। इसमें केंद्र-राज्य के बीच 60:40 का वित्तीय साझाकरण होगा, जबकि पूर्वोत्तर, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इससे राज्यों की जवाबदेही और स्वामित्व बढ़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि रोजगार कार्यों को स्थानीय कृषि कैलेंडर के अनुरूप रखा गया है, ताकि किसान खेती और मजदूरी दोनों को संतुलित कर सकें। प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों में 60 दिनों तक कार्य रोकने की भी व्यवस्था की गई है।
अंत में मंत्री ने कहा कि जी-राम-जी महात्मा गांधी की ग्रामीण सशक्तिकरण की सोच से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य प्रतीकात्मक नहीं बल्कि वास्तविक और जवाबदेह विकास सुनिश्चित करना है।
और पढ़ें: पंजाब में मनरेगा में 10 हजार से ज्यादा अनियमितताएं उजागर, विशेष विधानसभा सत्र के दौरान केंद्र का पलटवार