यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सऊदी जहाजों की समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इसे "आंख के बदले आंख" की नीति के तहत लागू किया जा रहा है।
हूतियों का कहना है कि यह फैसला सना अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर सऊदी अरब द्वारा कथित हवाई हमलों और लंबे समय से जारी नाकेबंदी के जवाब में लिया गया है। हूती मीडिया कार्यालय के उपप्रमुख नसरुद्दीन आमेर ने कहा कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य अब सऊदी जहाजों के लिए बंद रहेगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2015 में सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ सैन्य गठबंधन का नेतृत्व किया था और यमन पर हवाई एवं समुद्री नाकेबंदी भी लगाई थी। हालांकि 2022 में दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस संघर्ष को फिर से भड़का दिया है। हूतियों ने हाल ही में अभा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर मिसाइल और ड्रोन हमले भी किए थे।
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विशेषज्ञों के अनुसार, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। यह मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और तेल, प्राकृतिक गैस तथा अन्य वाणिज्यिक सामान की ढुलाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस घटनाक्रम का भारत पर भी सीधा असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। यदि इस समुद्री मार्ग पर संकट गहराता है तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत का आयात बिल, महंगाई और परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है। साथ ही यूरोप को होने वाले भारतीय निर्यात पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि जहाजों को लंबा समुद्री मार्ग अपनाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाब-अल-मंदेब और होर्मुज़ जलडमरूमध्य दोनों क्षेत्रों में तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत के व्यापार पर भी व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
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