विश्व आर्थिक मंच (WEF) के अध्यक्ष बोर्गे ब्रेंडे ने दावोस में बातचीत में कहा कि भारत इस वर्ष बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला देश बन सकता है और अकेले ही वैश्विक आर्थिक वृद्धि में लगभग 20 प्रतिशत तक योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि अब उपलब्ध आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत की वृद्धि केवल घरेलू नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।
ब्रेंडे ने कहा, “मुझे अब भी लगता है कि इस साल भारत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ी से बढ़ेगा। हमारे पास ऐसे आंकड़े हैं जो दिखाते हैं कि भारत वैश्विक वृद्धि का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा बन सकता है। इसका मतलब है कि भारत की प्रगति पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को गति दे रही है।”
उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि इस मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के साथ यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक व्यापार समझौता हो जाता है, तो यह और भी सहायक होगा। ब्रेंडे के अनुसार, भारत की इस संभावनाशील स्थिति के पीछे आर्थिक सुधारों की तेज़ रफ्तार है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अपेक्षा से कहीं अधिक तेज़ और प्रभावी सुधार लागू किए हैं, जिससे वह भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अधिक आशावादी हैं।
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दावोस शिखर सम्मेलन पर वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं की छाया को लेकर पूछे गए सवाल पर ब्रेंडे ने कहा कि यूक्रेन युद्ध, गाज़ा पुनर्निर्माण, ईरान, यमन, लैटिन अमेरिका और हालिया ग्रीनलैंड विवाद जैसे मुद्दों ने वैश्विक माहौल को जटिल बना दिया है। इसके बावजूद उन्हें उम्मीद है कि विश्व नेता आपसी संवाद से समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर बात करते हुए WEF प्रमुख ने कहा कि इसे “आधा भरा या आधा खाली गिलास” दोनों तरह से देखा जा सकता है। AI नई तकनीकों के ज़रिए विकास को गति दे सकती है और चिकित्सा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में वर्षों का काम कुछ ही सालों में संभव बना सकती है। हालांकि, इसके दुरुपयोग और स्वायत्त हथियारों जैसे खतरों को लेकर उन्होंने चिंता भी जताई।
WEF की ‘ग्लोबल रिस्क्स रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, भू-आर्थिक टकराव निकट भविष्य का सबसे बड़ा जोखिम बनकर उभरा है। दावोस-क्लोस्टर्स में आयोजित WEF के 56वें संस्करण में 130 से अधिक देशों के लगभग 3,000 नेता हिस्सा ले रहे हैं।
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