भारत और पाकिस्तान के बीच बासमती चावल के वैश्विक बाजार को लेकर लंबे समय से प्रतिस्पर्धा चल रही है। विशेष रूप से यूएई (UAE) और मध्य पूर्व के देशों में दोनों ही देशों की बासमती चावल की भारी मांग रहती है। इस बीच पाकिस्तान ने अपने निर्यात को बढ़ाने और बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एक नई योजना शुरू की है।
भारत बासमती चावल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है। भारत में विकसित की गई प्रसिद्ध किस्म 1121 बासमती चावल वैज्ञानिक विजय पाल सिंह की देन है, जिसे विकसित करने में लगभग 20 वर्ष लगे थे। यह किस्म भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है और इससे हर साल लगभग 25,000 करोड़ रुपये की आय होती है।
भारत के प्रमुख खरीदार देशों में सऊदी अरब, ईरान और इराक शामिल हैं। वहीं पाकिस्तान भी यूएई, सऊदी अरब, ईरान, कुवैत, कतर, ओमान, ब्रिटेन और यूरोप में अपने निर्यात को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
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हाल ही में ईरान-अमेरिका के बीच शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग सामान्य होने लगी है, जिससे व्यापारिक गतिविधियां तेज हुई हैं। इसी मौके का फायदा उठाने के लिए पाकिस्तान ने एक नई योजना शुरू की है, जिसके तहत निर्यातकों को टैक्स रिफंड दिया जा रहा है। यदि बासमती चावल की कीमत 750 डॉलर प्रति टन या उससे अधिक है, तो 9% तक टैक्स रिफंड मिलता है, जबकि कम कीमत वाले चावल पर 3% लाभ दिया जा रहा है।
इस योजना का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ते दामों पर चावल बेचना है, लेकिन अभी तक इसके बड़े परिणाम सामने नहीं आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में पाकिस्तान के चावल निर्यात में 35% से अधिक गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान कम कीमत की रणनीति से कुछ बाजारों में भारत को चुनौती दे सकता है, लेकिन भारत की मजबूत उत्पादन क्षमता, ब्रांड वैल्यू और वर्षों पुराना व्यापार नेटवर्क उसे लंबे समय तक वैश्विक बाजार में बढ़त दिलाए रखेगा।
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